बूरे फंसे सर्राफा कारोबारी, सोलापुर में आयकर की छापेमारी, 200 करोड़ की बेहिसाबी संपत्ति जब्त

Solapur News: सोलापुर में आयकर विभाग ने सर्राफा कारोबारियों, बिल्डर्स और वकील के ठिकानों पर एक साथ छापामार कारवाई की गई। जिसमें अहम दस्तावेज जप्त और 200 करोड़ से ज्यादा की बेहिसाबी संपत्ति जब्त की गई।
सोलापुर में आयकर की छापेमारी
सोलापुर में आयकर की छापेमारी (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Solapur Income Tax Raid : पिछले सप्ताह आयकर विभाग ने शहर के दो सर्राफा व्यापारियों, चार रियल एस्टेट कारोबारियों और एक प्रसिद्ध वकील की फर्म तथा उनके आवासों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई की समीक्षा करने के लिए पुणे स्थित आयकर विभाग के महानिदेशक (अन्वेषण) संदीप प्रधान और प्रधान महानिदेशक (अन्वेषण) मोहित जैन शुक्रवार को सोलापुर पहुंचे। उनके साथ अतिरिक्त निदेशक (अन्वेषण) सौरभ नायक भी मौजूद थे।

सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई में लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाबी संपत्ति को जब्त और सील किया गया है। आयकर विभाग के उपनिदेशक (अन्वेषण) मनीष रावत के पास सोलापुर और कोल्हापुर जिले की जिम्मेदारी है। दो साल पहले शहर के मध्य क्षेत्र में जमीन खरीद-फरोख्त के लेन-देन में बड़े पैमाने पर कालाधन उपयोग किए जाने की जानकारी विभाग को मिली थी। इसके बाद चार बिल्डरों को विभाग की निगरानी सूची में शामिल किया गया।

अवैध मनी लॉन्ड्रिंग

इसके अलावा, कुछ सर्राफा व्यवसायियों द्वारा अवैध मनी लॉन्ड्रिंग किए जाने के प्रमाण मिलने पर, महानिदेशक प्रधान और जैन के निर्देशन में एक साथ सात स्थानों पर निवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर योजनाबद्ध छापे मारे गए। इस अभियान में सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट्स सहित लगभग 90 आयकर निरीक्षक शामिल थे।

दस्तावेज जब्त

अभियान के दौरान अधिकारियों के हाथ गोपनीय हिसाब-किताब की डायरी, महत्वपूर्ण दस्तावेज, सोना-चांदी के आभूषण और बड़ी मात्रा में नकदी लगी। डायरी में दर्ज वित्तीय लेन-देन के बारे में संबंधित व्यक्तियों से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वह डायरी तथा अन्य दस्तावेज जब्त किए गए।

टैक्स चोरी और अवैध वित्तीय कारोबार

छापेमारी में यह भी स्पष्ट हुआ कि शामिल व्यक्तियों के बीच आपसी आर्थिक लेन-देन चल रहा था। शुक्रवार को आयकर विभाग के उच्चाधिकारी सोलापुर स्थित कार्यालय में उपस्थित होकर, छापे में मिले मुद्देमाल, दस्तावेजों और पंचनामे की विस्तृत जानकारी ली। कर चोरी की सही रकम अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद टैक्स चोरी और अवैध वित्तीय कारोबार करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।

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