'बैकफुट पर मनोज जरांगे पाटिल', अगले 1 साल तक नहीं करूंगा कोई दौरा, जान का खतरा और गिरता स्वास्थ्य बनी वजह

Manoj Jarange Patil Karmala News: मनोज जरांगे पाटिल ने स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से अगले एक साल तक अपने सभी दौरे रद्द किए। करमाळा में धमकियों और शारीरिक कमजोरी का दिया हवाला।
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Manoj Jarange Patil Karmala News (फोटो क्रेडिट-X)
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Maratha Reservation Protest Break: मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने करमाला (सोलापुर) में एक ऐसा चौंकाने वाला निर्णय लिया है, जिसने पूरे महाराष्ट्र के सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। लगातार हो रहे उपवास और राज्यव्यापी दौरों के कारण गिरते स्वास्थ्य और खुद की जान को खतरे का हवाला देते हुए, जरांगे पाटिल ने अगले एक साल के लिए अपने सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों और दौरों को स्थगित करने का ऐलान किया है।

शहीद जवान नवनाथ गात के स्मृति दिवस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे जरांगे ने भावुक होते हुए कहा कि अब उनके शरीर में संघर्ष करने की शक्ति कम हो रही है और उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं।

"मुझे मारने की साजिश और जान का खतरा"

करमाला में मीडिया से बात करते हुए मनोज जरांगे ने सनसनीखेज दावा किया कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा, "मुझ पर घात लगाकर हमला किया जा सकता है। मैं मौत से नहीं डरता, लेकिन अपने समाज के लिए मुझे अभी बहुत काम करना है। मेरे पीछे मेरा परिवार भी दांव पर लगा है।" जरांगे ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों और समाज के लिए एक नई कार्यप्रणाली (यंत्रणा) खड़ी करने के उद्देश्य से उन्होंने दौरों पर विराम लगाने का कठिन फैसला लिया है।

जर्जर स्वास्थ्य: "सलाइन लगाने के लिए नस तक नहीं मिल रही"

लगातार भूख हड़ताल और भागदौड़ ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता जरांगे पाटिल के शरीर को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने अपनी शारीरिक स्थिति साझा करते हुए बताया कि हर 20-22 दिनों में उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। डॉक्टरों की टीम ने चेतावनी दी है कि उनके शरीर में पोषक तत्वों की भारी कमी हो गई है। जरांगे ने कहा, "डॉक्टर परेशान हैं क्योंकि सलाइन लगाने के लिए हाथ में नस (Vein) तक नहीं मिल रही है। शरीर में अब कुछ बचा ही नहीं है, इसलिए अब मुझे आराम और रणनीति पर ध्यान देने की जरूरत है।"

समर्थकों से अपील: "बड़े दिल से मुझे छुट्टी दें"

जरांगे पाटिल ने मराठा समाज और अपने समर्थकों से हाथ जोड़कर अपील की कि वे उन्हें कार्यक्रमों में बुलाना बंद करें। उन्होंने कहा, "अगर मैं आपके घर के किसी कार्यक्रम, शादी या सप्ताह में न आ पाऊं, तो कृपया बड़ा दिल रखें। मैं एक जगह बैठकर आपके बच्चों के भविष्य के लिए काम करना चाहता हूं।" उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि हैदराबाद गजट लागू करने और कुणबी प्रमाण पत्र बांटने के वादे के छह महीने बाद भी देरी की जा रही है, जिसे वे अब एक नई रणनीति के साथ आगे बढ़ाएंगे।

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