गुलियन-बैरे सिंड्रोम से सोलापुर में पहली मौत, मरीजों की संख्या 100 के पार, जानें क्या हैं लक्षण
महाराष्ट्र में गुलियन-बैरे सिंड्रोम अब मौत का तांडव दिखाने की शुरुआती दौर में पहुंच गया है। इस सिंड्रोम ने अब तक पुणे में 100 से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है और सोलापुर में अब तो एक मौत की खबर भी सामने आई है।
- Written By: प्रिया जैस
गुलियन-बैरे सिंड्रोम (सौजन्य-सोशल मीडिया)
सोलापुर: महाराष्ट्र के पुणे में बढ़ता गुलियन-बैरे सिंड्रोम अब फैलता जा रहा है। पिछले एक हफ्ते में गुलियन-बैरे सिंड्रोम के कुल 100 मामले सामने आ चुके है। इतना हीं नहीं बल्कि अब तो इस सिंड्रोम से मौत होने की खबरें सामने आ रही है।
गुलियन-बैरे सिंड्रोम की गिरफ्त में आए 100 मरीजों में से 16 मरीजों की हालत इतनी बिगड़ गई है कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है और कई मरीजों की हालत गंभीर है। इस बीमारी के बारे में ये पता चल पाना फिलहाल मुश्किल है कि ये किस उम्र के लोगों को अपना शिकार बना रहा है क्योंकि अब तक सामने आए मामलों में एक नवजात शिशु से लकेर अधेड़ उम्र के बुजुर्ग भी शामिल है।
पुणे में हुआ था संक्रमण का शिकार
सोलापुर से अब ये खबर सामने आ रही है कि गुलियन-बैरे सिंड्रोम के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई है। पुणे के एक अधिकारिक बयान में ये बात सामने आई है रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ित व्यक्ति पुणे में संक्रमण का शिकार हुआ था और फिर सोलापुर जा रहा था, जहां उसकी मौत हो गई।
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इस सिंड्रोम ने अब ऐसे हालात बना दिए है कि अब ये जानना बहुत जरूरी हो गया है कि गुलियन-बैरे सिंड्रोम क्या है और इसके लक्षण क्या है? साथ ही इससे बचने के लिए और क्या उपाय हो सकते है।
क्या है गुलियन-बैरे सिंड्रोम
गुलियन-बैरे सिंड्रोम एक ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है, जो कि सीधा इंसानों की इम्यून सिस्टम पर अटैक करता है। ये इस तरह से असर करता है कि लोगों के उठने-बैठने और चलने में तकलीफों का सामना करना पड़ता है। बढ़ जाने पर सांस लेने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी के एक लक्षण में तो लकवा भी शामिल है।
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क्या हैं गुलियन-बैरे सिंड्रोम के शुरुआती लक्षण
1. हाथों पैरों और टखने ये कलाई में झुनझुनी आना
2. चलने में कमजोरी और सीढ़ियां चढ़ने में तकलीफ होना
3. पैरों में कमजोरी
4. आंखों में डबल विजन और आंखों को हिलाने और देखने में दिक्कत होना
5. बोलते समय, चबाते समय या निगलते समय दिक्कत होना
6. मांसपेशियों में तेज दर्द होना
7. पेशाब और मल त्याग करते समय दिक्कत होना
8. सांस लेने में तकलीफ होना।
