जो अजित पवार के साथ हुआ वही शिंदे के साथ भी हो सकता है: शिंदे गुट के नेता दत्ता मगर ने ऐसा क्यो कहा?
Shivsena Leader Datta Magar Statement: शिवसेना नेता दत्ता मगर ने दी अपनी ही सरकार को चेतावनी। रोहित पवार के मंच से कहा- जो अजित पवार के साथ हुआ, वही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ भी हो सकता है।
- Written By: गोरक्ष पोफली
एकनाथ शिंदे और अजित पवार (सोर्स: फाइल फोटो)
Datta Magar Warns Eknath Shinde: महाराष्ट्र की राजनीति में समय-समय पर आने वाले राजनीतिक भूचालों के बीच अब एक नई और सनसनीखेज भविष्यवाणी ने हड़कंप मचा दिया है। मालशिरस पंचायत समिति के सभापति और शिवसेना के स्थानीय कद्दावर नेता दत्ता मगर ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सोलापुर से लेकर मुंबई तक के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
अजित पवार जैसा होगा घात?
पंढरपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दत्ता मगर ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, हम सभी जानते हैं कि उपमुख्यमंत्री अजित दादा पवार के साथ क्या हुआ और कैसे उनका धोखा हुआ। जिस तरह अजित दादा के साथ हुआ, ठीक उसी तरह शिवसेना के मुख्य नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ भी घात होने की संभावना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिंदे को अब सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि उनके साथ भी वैसा ही खेल हो सकता है जैसा अजित पवार के साथ हुआ था।
रोहित पवार के मंच से अपनी ही सरकार को घेरा
हैरानी की बात यह है कि शिवसेना शिंदे गुट के पदाधिकारी होने के बावजूद दत्ता मगर, विपक्षी नेता रोहित पवार के अन्नत्याग आंदोलन को समर्थन देने पंढरपुर पहुंचे थे। रोहित पवार वहां किसानों की कर्जमाफी के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर ने मंच से कहा कि वे सरकार का हिस्सा जरूर हैं, लेकिन किसानों के मुद्दे पर वे रोहित पवार के साथ खड़े हैं।
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एक दुखी किसान का दर्द
दत्ता मगर के इस बागी तेवर के पीछे उनकी निजी पीड़ा भी सामने आई। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, मैं शिवसेना का सभापति जरूर हूं, लेकिन पहले एक किसान हूं। चक्रवात में मेरी खुद की 10 एकड़ की केले की फसल बर्बाद हो गई, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार में पद पर बैठे व्यक्ति की सुनवाई नहीं हो रही, तो आम जनता और किसानों का क्या हाल होगा?
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राजनीतिक गलियारों में हलचल
दत्ता मगर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका यह संदेश उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तक पहुँचना चाहिए ताकि वे समय रहते सचेत हो सकें। इस सनसनीखेज बयान के बाद सोलापुर के राजनीतिक क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि शिवसेना नेतृत्व और प्रशासन इस चेतावनी या बगावत पर क्या रुख अपनाता है।
