मराठा आंदोलन में लाठीचार्ज, शंभुराज पर हमला, विवादित रहा है सतारा एसपी का फैसला, जानें कौन हैं तुषार दोशी?

Tushar Doshi Controversy: सतारा जिला परिषद चुनाव विवाद में एसपी तुषार दोशी के निलंबन का आदेश। शंभुराज देसाई ने लगाया मारपीट का आरोप। जानें कौन हैं विवादित आईपीएस तुषार दोशी।
Who Is Tushar Doshi SP Satara
Who Is Tushar Doshi SP Satara (फोटो क्रेडिट-X)
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Who Is Tushar Doshi SP Satara: सतारा जिला परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार के भीतर एक दरार पैदा कर दी है। चुनाव के दौरान पुलिस और मंत्रियों के बीच हुई धक्का-मुक्की के बाद अब सतारा के पुलिस अधीक्षक (SP) तुषार दोशी के निलंबन का आदेश दिया गया है। 2001 बैच के इस आईपीएस अधिकारी का करियर जितना रसूखदार रहा है, विवादों से उनका नाता उतना ही गहरा रहा है।

मंत्री शंभूराज देसाई ने सदन में आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया, जिसके बाद विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोऱ्हे ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

विवादों का इतिहास: जालना से सतारा तक

आईपीएस तुषार दोशी पहली बार सुर्खियों में तब आए जब सितंबर 2023 में जालना में मराठा प्रदर्शनकारियों पर बर्बर लाठीचार्ज हुआ था। उस समय भी उन्हें 'अनिवार्य अवकाश' पर भेज दिया गया था। इसके बाद उनकी नियुक्ति सतारा में हुई, लेकिन यहाँ भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। फलटन में एक महिला डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में उनके बयान की काफी आलोचना हुई थी, जहाँ उन पर मामले को हल्का करने के आरोप लगे थे।

मंत्रियों के साथ बदसलूकी का आरोप

सोमवार को सदन में मंत्री शंभूराज देसाई ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, "10 पुलिसकर्मी मुझे घसीट रहे थे। पुलिस एक मंत्री को ऐसे खींच रही थी जैसे वह कोई अपराधी हो।" देसाई का दावा है कि सतारा पुलिस ने जानबूझकर उनके सदस्यों को मतदान से रोका ताकि चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकें। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उपसभापति ने न केवल एसपी दोशी के निलंबन के आदेश दिए, बल्कि पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज की जांच के निर्देश भी दिए हैं।

कौन हैं तुषार दोशी?

तुषार दोशी 2001 बैच के महाराष्ट्र कैडर के अधिकारी हैं। उनकी पहली पोस्टिंग चंद्रपुर में हुई थी। वे पुणे पुलिस में साइबर विभाग के उपायुक्त और नवी मुंबई में डीसीपी के पद पर भी काम कर चुके हैं। हालांकि, नवी मुंबई में अश्विनी बिद्रे-गोरे हत्याकांड के दौरान भी उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे थे। अब सतारा की घटना ने उनके करियर पर एक बार फिर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जहाँ सत्ताधारी दल के मंत्री ही उनके खिलाफ मोर्चा खोलकर खड़े हैं।

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