नीलम गोर्हे ने लांघी अपनी मर्यादा? 100 पुलिसकर्मियों के सस्पेंशन पर CM फडणवीस और अनिल परब आए साथ

Satara SP Tushar Doshi Suspension: सीएम फडणवीस का बड़ा बयान- "सभापति का आदेश ब्रह्मवाक्य नहीं"। सातारा एसपी के निलंबन पर संवैधानिक अधिकारों की जंग। कार्यपालिका के काम में हस्तक्षेप पर दी चेतावनी।
CM Devendra Fadnavis clarifies that the Speaker's order isn't 'Brahmavakya' regarding executive powers. Satara SP Tushar Doshi's suspension sparked a constitutional debate.
देवेंद्र फडणवीस और अनिल परब (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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CM Devendra Fadnavis Vidhan Parishad Speech: सातारा जिला परिषद चुनाव के दौरान मंत्री शंभूराज देसाई के साथ हुई धक्का-मुक्की के बाद उपजा विवाद अब विधान परिषद में संवैधानिक अधिकारों की बहस का केंद्र बन गया है। सातारा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) तुषार दोषी के निलंबन के निर्देश पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में स्पष्ट किया कि पीठासीन अधिकारी को कार्यपालिका (एग्जीक्यूटिव) के अधिकारों में हस्तक्षेप करने की शक्ति नहीं है।

निलंबन का अंतिम अधिकार केवल कार्यपालिका के पास ही है। इसलिए पीठासीन अधिकारी का निर्देश 'ब्रह्म वाक्य' नहीं हो सकता है। उन्होंने इस तरह से पीठासीन अधिकारियों को इस माध्यम से आगे के लिए एक चेतावनी भी दे दी है।

सोमवार को उपसभापति नीलम गोहें ने सातारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी सहित 100 पुलिसकर्मियों के निलंबन के आदेश दे दिए। इस फैसले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने एक स्वर में सवाल खड़ा किया कि क्या सभापति या उपसभापति को किसी अधिकारी को निलंबित करने का संवैधानिक अधिकार है?

अनिल परब ने उठाया नियम 97 के तहत सवाल

बीते 20 मार्च को सातारा जिला परिषद के चुनाव के दौरान भारी हंगामा हुआ था। इस दौरान मंत्री शंभूराज देसाई के साथ सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से धक्का-मुक्की की थी, इससे देसाई को चोट भी लगी थी।

इस घटना के विरोध में देसाई ने सोमवार को विधान परिषद में एसपी तुषार दोषी समेत अन्य पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपसभापति गोहें ने तत्काल निलंबन के निर्देश दे दिए थे।

शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) के नेता अनिल परब और राकां शरदचंद्र पवार के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने मंगलवार को विधान परिषद में यह मुद्दा फिर उठाया, परब ने नियम 97 के तहत सवाल किया कि क्या पीठासीन अधिकारी किसी आईपीएस अधिकारी को निलंबित करने का निर्देश दे सकते हैं?

विपक्ष और सत्तापक्ष की शंकाओं का समाधान करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि संविधान ने कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के अधिकार स्पष्ट रूप से बांटे हैं। पीठासीन अधिकारी सम्माननीय है, उनके निर्देश महत्वपूर्ण होते हैं।

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