

Ratnagiri Seahorse Rescue Ghost Fishing Nets: महाराष्ट्र के तटीय जिले रत्नागिरी से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बेहद सुखद और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। समुद्र में अवैध रूप से छोड़े गए मछली पकड़ने के घातक जालों फंसे तीन दुर्लभ 'सीहॉर्स' को एक रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बचा लिया गया है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) और महाराष्ट्र राज्य वन विभाग की संयुक्त टीम ने इन्हें बचाया और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवास (समुद्र) में वापस भी छोड़ दिया।
वन विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, ये तीनों सीहॉर्स रत्नागिरी की मिरिया, कड़बादेवी और शिरगांव की खाड़ियों में पाए गए थे। मछुआरों द्वारा समुद्र में लावारिस छोड़ दिए गए जालों में ये बुरी तरह उलझ चुके थे। इस तरह के जालों को घोस्ट फिशिंग नेट्स या भूतिया मछली पकड़ने के जाल कहा जाता है।
बचाए जाने के बाद, इन समुद्री घोड़ों को निगरानी और इलाज के लिए BNHS रत्नागिरी फील्ड स्टेशन पर बनी खास देखभाल और पुनर्वास सुविधा में भेजा गया। BNHS की समुद्री वैज्ञानिक डॉ. तेजल विजयपुरे ने कहा कि पूरी तरह ठीक होने तक इन जानवरों को सख्त निगरानी और नियंत्रित स्थितियों में रखा गया था।
4 जून को, पशु चिकित्सा जांच में स्वस्थ पाए जाने के बाद, इन समुद्री घोड़ों को उन्हीं जगहों पर उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया गया जहां वे मिले थे। यह पूरा ऑपरेशन MMBCF और महाराष्ट्र वन विभाग के मैंग्रोव सेल के साथ मिलकर किया गया।
सीहॉर्स (समुद्री घोड़े) छोटी समुद्री मछलियां होती हैं, जिनकी लंबाई आमतौर पर कुछ सेंटीमीटर ही होती है। इन्हें इनके खास घोड़े जैसे सिर से आसानी से पहचाना जा सकता है। इससे उन्हें भारत में सबसे ऊंचे स्तर की कानूनी सुरक्षा मिलती है, जो बाघों और गंभीर रूप से लुप्तप्राय अन्य प्रजातियों के बराबर है।
'सीहॉर्स' वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची एक के तहत संरक्षित हैं, जो उन्हें आवास के नुकसान, आकस्मिक शिकार और अवैध व्यापार जैसे खतरों के कारण उच्चतम स्तर का कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।