14 साल बाद यशवंत शुगर मिल को नई उम्मीद, 100 एकड़ जमीन बिक्री पर कैबिनेट की मुहर

Pune News: महाराष्ट्र कैबिनेट ने यशवंत सहकारी शुगर मिल की 99.27 एकड़ जमीन बेचने को मंजूरी दी। इस फैसले से बंद पड़े मिल के पुनरुद्धार की राह खुल गई है, जिससे किसानों और श्रमिकों में खुशी का माहौल है।
यशवंत कारखाना जल्द होगा शुरु (pic credit; social media)
यशवंत कारखाना जल्द होगा शुरु (pic credit; social media)
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Maharashtra News: हवेली तहसील के थेऊर में स्थित यशवंत सहकारी शुगर मिल को नई उम्मीद मिली है। राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को हुई बैठक में कारखाने की 99.27 एकड़ जमीन बिक्री को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय मिल को लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक संकट से बाहर निकालने और उसके पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, एकनाथ शिंदे और अन्य मंत्री भी मौजूद रहे। कैबिनेट के इस फैसले के बाद किसानों और मिल से जुड़े श्रमिकों में खुशी का माहौल है। मिल के अध्यक्ष सुभाष जगताप ने कहा कि कारखाने को दोबारा शुरू करने के लिए सरकार ने सकारात्मक पहल की है। आगे सभी निर्णय किसानों और श्रमिकों के हित में लिए जाएंगे।

कर्ज और बंदी की मार

यशवंत सहकारी शुगर मिल पिछले 14 साल से आर्थिक अनियमितताओं और भारी घाटे की वजह से बंद है। फिलहाल यह कारखाना महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के नियंत्रण में है। बकाया गन्ना बिल, कर्मचारियों का वेतन और बैंकों का कर्ज चुकाने के लिए बड़े पैमाने पर फंड की जरूरत है। इसे भी पढ़ें- राजगढ़ शुगर फैक्ट्री को 402 करोड़ का कर्ज, बीजेपी में संग्राम थोपटे की एंट्री पर उठे सवाल

जमीन बिक्री से मिलेगा नया सहारा

कारखाने को दोबारा शुरू करने के लिए, इसकी 99.27 एकड़ जमीन 299 करोड़ रुपये में कृषि उपज बाजार समिति को बेचने का प्रस्ताव रखा गया था। इसे कारखाने के सदस्यों और संचालक मंडल ने मंजूरी दी थी। अब राज्य मंत्रिमंडल की हरी झंडी मिलने से कारखाने के पुनरुद्धार का रास्ता साफ हो गया है।

विरोध की भी गूंज

हालांकि, इस फैसले का विरोध भी सामने आ रहा है। यशवंत बचाव शेतकरी संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि मामला अभी उच्च न्यायालय में लंबित है और ऐसे समय पर जमीन बिक्री की मंजूरी से बड़े आर्थिक घोटाले की आशंका है। समिति के अध्यक्ष विकास लवांडे ने कहा कि यह फैसला बैंक और कारखाना प्रबंधन की मनमानी को बढ़ावा देता है।

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