चाचा की बनाई विरासत भतीजे की आखिरी मंजिल! क्या है ‘विद्या प्रतिष्ठान’, जहां अजित पवार को दी जाएगी अंतिम विदाई
Ajit Pawar: विद्या प्रतिष्ठान की स्थापना 16 अक्टूबर 1972 को अजित पवार के चाचा और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने की थी। उस समय बारामती एक पिछड़ा हुआ सूखाग्रस्त इलाका था।
- Written By: मनोज आर्या
अजित पवार, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Ajit Pawar Last Rites: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का अंतिम संस्कार बारामती के जिस विद्या प्रतिष्ठान के प्रांगण में हो रहा है, वह महज एक मैदान या स्कूल नहीं है। यह पवार परिवार के सपनों की वह ‘प्रयोगशाला’ है, जिसने बारामती की पहचान बदलकर रख दी। अजित पवार के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए यहीं रखा गया है और यहीं वे पंचतत्व में विलीन होंगे। इस जगह का चुनाव अनायास नहीं हुआ है। विद्या प्रतिष्ठान से पवार खानदान का रिश्ता खून और पसीने का है।
विद्या प्रतिष्ठान की स्थापना 16 अक्टूबर 1972 को अजित पवार के चाचा और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने की थी। उस समय बारामती एक पिछड़ा हुआ सूखाग्रस्त इलाका था। शरद पवार का सपना था कि गांव के किसान और मजदूरों के बच्चों को वही अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा मिले जो पुणे या मुंबई के बच्चों को मिलती है। इसी सोच के साथ बंजर और पथरीली जमीन पर इस संस्था की शुरुआत हुई, जिसे आज ‘विद्यानगरी’ कहा जाता है।
संस्था के शिल्पकार थे अजित पवार
भले ही नींव शरद पवार ने रखी, लेकिन इसे आधुनिक रूप देने में अजित पवार की भूमिका एक ‘शिल्पकार’ की रही। संस्था के दस्तावेजों और इतिहास में अजित पवार को संस्था का तत्काल, प्रभावी और बिना शर्त समर्थन देने वाला बताया गया है। जब भी संस्था को विस्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर या फंड की जरूरत पड़ी, अजित पवार दीवार बनकर खड़े रहे। वे सुनिश्चित करते थे कि बारामती के इस कैंपस में दुनिया की बेहतरीन सुविधाएं हों, चाहे वह आईटी कॉलेज हो या बायोटेक्नोलॉजी सेंटर। यही कारण है कि आज उनके अंतिम संस्कार के लिए इस जगह को चुना गया। यह उनकी ‘कर्मभूमि’ थी, जहां उन्होंने शिक्षा के जरिए हजारों जिंदगियां संवारीं।
सम्बंधित ख़बरें
पाप धोने की नौटंकी या शातिर चाल? पहले भगवान से मांगी माफी, फिर नागपुर के मंदिर में डाला डाका, देखें VIDEO
खत्म हो रहा है सब्र, अजित पवार विमान दुर्घटना की जांच में हो रही देरी पर भड़के युगेन्द्र पवार, पूछा सवाल
बारामती और कलवण में भीषण सड़क हादसे: 2 सगे भाइयों समेत नवविवाहित दंपति की मौत; सीसीटीवी में कैद हुई घटना
Traffic Jam में फुटपाथ पर बाइक चढ़ाना पड़ सकता है भारी, कोर्ट चालान, जुर्माने और जेल का भी खतरा
पत्नी सुनेत्रा पवार हैं इसकी ‘कस्टोडियन’
अजित पवार का परिवार इस संस्था से सीधे तौर पर जुड़ा है। उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी हैं। राजनीति में सक्रिय होने के बावजूद, सुनेत्रा पवार का ज्यादातर समय इसी कैंपस में बीतता है। वे संस्था की रोजमर्रा की गतिविधियों, छात्रों के विकास और नए प्रोजेक्ट्स की निगरानी करती हैं। संस्था की 46वीं वर्षगांठ पर सुनेत्रा पवार ने भावुक होकर कहा था कि यह संस्था एक ज्ञान का स्वर्ग है जो पथरीली जमीन पर खड़ा हुआ है। नियति का खेल देखिए, आज उसी ‘स्वर्ग’ के प्रांगण में वे अपने पति को अंतिम विदाई देंगी।
बंजर जमीन से वर्ल्ड क्लास कैंपस तक
आज जहां अजित पवार का अंतिम संस्कार होगा, वह 150 एकड़ में फैला एक विशाल कैंपस है। यहां बाल विकास मंदिर से लेकर इंजीनियरिंग, लॉ, बायोटेक्नोलॉजी और आईटी तक के कॉलेज हैं। करीब 25,000 से ज्यादा छात्र यहां पढ़ते हैं और हजारों लोगों को यहां रोजगार मिला है। कैंपस में शरद पवार को मिले उपहारों और सम्मानों का एक म्यूज़ियम भी है, जो पवार परिवार की विरासत को संजोए हुए है।
यह भी पढ़ें: विलासराव देशमुख से अजित पवार तक, जब ‘मौत’ ने बदली महाराष्ट्र की सियासी दिशा, फिर दोहराया जाएगा इतिहास?
जहां भविष्य गढ़ा, वहीं से आखिरी विदाई
अजित पवार के अंतिम संस्कार के लिए विद्या प्रतिष्ठान को चुनना एक गहरा संदेश देता है। यह बताता है कि अजित पवार की असली विरासत सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि वह शिक्षा और विकास है जो उन्होंने बारामती को दिया। जिस मैदान में खेलकर और पढ़कर बारामती की पीढ़ियां बड़ी हुईं, आज उसी मैदान की मिट्टी में उनका ‘दादा’ हमेशा के लिए मिल जाएगा।
