Pune- Solapur Highway पर वाकड़ा पुल अंडरपास जल्द खुलेगा, 200 से अधिक दुर्घटनाओं का खतरा घटेगा

Pune- Solapur National Highway पर बनने वाला वाकड़ा पुल का अंडरपास ब्रिज का काम अब आखिरी फेज पर हैं। इस अंडरपास जल्द ही जनता के लिए खुल सकता है, जिसके कारण हादसे कम हो सकते हैं।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Pune News In Hindi: पुणे-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हवेली तहसील सोरतापवाड़ी (हवेली) क्षेत्र के म्हसोबा फाटा में स्थित बहुचर्चित वाकड़ा पुल का अंडरपास ब्रिज का काम अब अंतिम चरण में है।

इस अंडरपास के जल्द ही यातायात के लिए खुलने की उम्मीद है, जिससे हाईवे पर होने वाले हादसों का खतरा कम होगा और स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा यह काम तेजी से किया जा रहा है।

इसी समस्या को देखते हुए, पेठ, नायगांव, और सोरतापवाड़ी ग्राम पंचायतों के निवासियों ने इस क्षेत्र में एक अंडरपास बनाने की मांग की थी। सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी सुजीत चौधरी, हवेली तालुका राष्ट्रवादी कांग्रेस युवा अध्यक्ष अमोल चौधरी, पूर्व सरपंच सूरज चौधरी, खंडेराव चौधरी, विष्णु चौधरी, सुजीत हाके, सिद्धांत चौधरी, सचिन चौधरी, गणेश चौधरी, राकेश चौधरी ने मिलकर शिरूर के सांसद डॉ अमोल कोल्हे से इस मुद्दे पर लगातार फॉलो-अप किया। ग्रामवासियों के बार-बार के आग्रह और फॉलो-अप के बाद, सांसद डॉ। अमोल कोल्हे ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को इस अंडरपास ब्रिज का काम शुरू करने के निर्देश दिए। सांसद के हस्तक्षेप के बाद, NHAI ने इस परियोजना पर तेजी से काम करना शुरू किया।

नागरिकों को होगी सुविधा, दूर होगी परेशानी

इस अंडरपास के निर्माण से अब सोरतापवाड़ी, खटाटेबस्ती, पेठ, नायगांव, प्रयागधाम और कोरेगांव मूल जैसे गांवों के लोगों की परेशानी दूर हो जाएगी। यह अंडरपास न केवल दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करेगा, बल्कि सोलापुर रोड से पुराने सोलापुर रोड की ओर जाने वाले नागरिकों के लिए एक बाधा रहित और महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी भी प्रदान करेगा।

अब तक 200 लोगों की दुर्घटनाओं में हुई मौत

पिछले कई सालों से, पुणे-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 65 पर स्थित इस 'वाकडा पूल' क्षेत्र में लगातार दुर्घटनाएं हो रही थीं। इन हादसों में अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। सड़क पार करते समय सामने से आ रहे वाहनों के कारण पैदल चलने वालों और वाहन चालकों दोनों को ही भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पार करना एक आम बात हो गई थी।

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