Pune: पार्किंग ठेकेदारों की मनमानी पर लगाम, मनपा करेगी स्वतंत्र अधिकारियों की नियुक्ति

Pune News: त्योहारों की खरीदारी के बीच पुणे में पार्किंग स्थलों पर ठेकेदारों की मनमानी बढ़ गई है।अब मनपा ने सभी 31 पार्किंग स्थलों पर नियंत्रण के लिए स्वतंत्र अधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय लिया है।
त्योहारों की खरीदारी के बीच पुणे में पार्किंग स्थलों पर ठेकेदारों की मनमानी बढ़ गई है। अब मनपा ने सभी 31 पार्किंग स्थलों पर नियंत्रण के लिए स्वतंत्र अधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय लिया है।
पुणे पार्किंग (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune Parking Issue: त्योहारों के मौसम में खरीदारी के लिए शहर के मध्यवर्ती इलाकों में भारी भीड़ उमड़ रही है। शहर के दूसरे हिस्सों से आने वाले नागरिक अपनी गाड़ियां महापालिका द्वारा उपलब्ध कराए गए पार्किंग स्थलों पर खड़ी करते हैं। लेकिन इन पार्किंग स्थलों का संचालन करने वाले ठेकेदार नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से शुल्क वसूल रहे हैं।

तय दर से पैसे देने वाले वाहन चालकों से भी झगड़े किए जा रहे हैं। इस स्थिति पर लगाम लगाने के लिए अब पुणे मनपा ने शहर के सभी 31 पार्किंग स्थलों पर कंट्रोल रखने के लिए स्वतंत्र अधिकारियों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने दी है।

पार्किंग शुल्क की जोनवार व्यवस्था

मनपा ने भीड़भाड़ और स्थान के आधार पर पार्किंग स्थलों को अ, ब और क तीन जोनों में बांटा है। जिसमें अ जोन-उपनगरों के पार्किंग स्थल (दर सबसे कम), ब जोन-मध्यम भीड़ वाले क्षेत्र जैसे स्टेशन, बस स्टैंड और क जोन-मुख्य बाजारपेठ और सबसे भीड़भाड़ वाले इलाके शामिल हैं। इस वर्गीकरण के आधार पर दोपहिया और फोर व्हीलर वाहनों के लिए शुल्क तय किया गया है। लेकिन अधिकांश ठेकेदार तय दर से अधिक वसूली कर रहे हैं। नागरिकों से बदसलूकी और धमकी देने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।

लक्ष्मी रोड पर हुआ हंगामा

गुरुवार शाम लक्ष्मी रोड के शिवाजीराव आढाव पार्किंग स्थल पर भारी भीड़ थी। इसी दौरान यहां दोपहिया के लिए तय 3 रुपये प्रति घंटे की जगह 10 रुपए वसूले जा रहे थे। एक घंटे से 5 मिनट भी अधिक रुकने पर सीधे 20 रुपये वसूल किए जा रहे थे। पावती मांगने वाले नागरिकों से बदतमीजी और धमकी दी जा रही थी। यह पार्किंग महापालिका की नहीं, मेरी है जैसी बात कहकर ठेकेदार के कर्मचारी दबदबा बना रहे थे। महिलाएं और बच्चे साथ होने के कारण अधिकांश नागरिक बहस में न पड़ते हुए अतिरिक्त पैसा देकर चुपचाप निकल रहे थे।

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