Pune City में भारी वाहनों के लिए समय प्रतिबंध, बावजूद अक्सर उल्लंघन

Pune और उसके आसपास के हाईवे पर हैवी गाड़ियों के कारण बढ़ते रोड़ एक्सीडेंट चिंता का विषय बन गया है। सिर्फ 5 सालों में हुए एक्सीडेंट में लगभग 1,400 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Pune News In Hindi: पुणे और आसपास के हाईवे पर भारी वाहनों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। पिछले पांच वर्षों में हुए हादसों में 1 हजार 4 सौ 75 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से लगभग 500 पैदल यात्री शामिल थे। यह स्थिति पुणे शहर और ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा की गंभीर खामियों को उजागर करती हैं।

पुलिस विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जनवरी से अगस्त तक के दौरान 195 दुर्घटनाओं में भारी वाहनों की संलिप्तता रही। जिनमें 199 लोगों की मौत हुई। इसका मतलब है कि हर महीने औसतन 25 लोगों की जान भारी वाहनों की वजह से जा रही है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि भारी वाहनों से दुर्घटनाओं की संख्या 1,200 से अधिक रही है।

जानकर बताते हैं कि भारी वाहनों के अधिकांश चालक बेहद लापरवाही से वाहन चलाते हैं। जिसमें ओवरलोडिंग के साथ साथ तेज रफ्तार, नशे में वाहन चलना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी आदि मुख्य कारण हैं और यही वहां है कि भारी वाहनों द्वारा अपघात के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं।

प्रतिबंधों को किया जा रहा लागू

पुणे शहर में भारी वाहनों के लिए सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक प्रवेश पर प्रतिबंध है, बावजूद इसके ऐसा देखा गया है कि ट्रक और डंपर जैसे वाहन कई बार शहरों में घुस आते हैं। निर्माण कार्यों और ट्रैफिक डायवर्जन के कारण भी बड़े वाहन अक्सर संकरी और भीड़भाड़ वाली सड़कों से होकर निकलते हैं। जानकारी के मुताबिक पुणे में अपघात के लिहाज से येरवडा, खराड़ी, वाघोली, शिक्रापूर, रांजणगांव, हडपसर से उरुली कांचन तक सोलापुर मार्ग, कात्रज, नाभाले पुल और खेड-शिवापुर की सड़के सबसे अधिक दुर्घटना प्रभावित क्षेत्र है।

इन जगहों पर भारी वाहनों की आवाजाही सबसे ज्यादा है और हादसों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। जानकर बताते हैं कि जब तक नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया जाएगा और नियमित निरीक्षण नहीं होगा, तब तक हादसों में कमी आना मुश्किल है। वहीं, ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी हिम्मत जाधव का कहना है कि प्रतिबंधों को लागू किया जा रहा है और CCTV निगरानी बढ़ाई गई है। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में दुर्घटनाओं की संख्या में थोड़ी गिरावट आई है।

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