

Supriya Sule on Nasrapur Case: पुणे जिले के नसरापुर में 4 साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या के मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल ला दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया की खामियों को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सवाल किया कि जिस अपराधी का पिछला रिकॉर्ड इतना भयानक था, वह खुलेआम बाहर कैसे घूम रहा था?
सुप्रिया सुले ने पुलिस और राज्य सरकार से बेहद कड़ा सवाल पूछा। उन्होंने कहा, पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है, यह ठीक है, लेकिन हमारा सवाल सरकार से है। अगर इस व्यक्ति पर पहले से ही दो गंभीर मामले दर्ज थे, तो वह जमानत (Bail) पर बाहर क्यों था? प्रशासन ने उसे समाज में खुलेआम घूमने की अनुमति कैसे दी? सुले ने भावुक होते हुए कहा कि यदि उस अपराधी को उसके पिछले अपराधों के लिए पहले ही कड़ी सजा मिल गई होती या उसे फांसी पर लटका दिया गया होता, तो आज दो मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
सुप्रिया सुले ने महाविकास अघाड़ी सरकार के समय पेश किए गए शक्ति अधिनियम (Shakti Act) का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार को भी घेरा। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बहुत अच्छा सुझाव दिया था और इस बिल का प्रस्ताव दिल्ली (केंद्र सरकार) को भेजा गया था।
उन्होंने आरोप लगाया, हमने शक्ति कानून का प्रस्ताव दिल्ली भेजा, लेकिन वहां की सरकार ने इस पर कुछ नहीं किया। अगर वह कानून लागू हो गया होता, तो इस दरिंदे को पहले ही सजा मिल चुकी होती और आज यह नौबत नहीं आती।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुले ने स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहतीं। उन्होंने कहा, हमारा मकसद राजनीति करना नहीं है, बल्कि उस मासूम बच्ची के लिए न्याय मांगना है। हम मांग करते हैं कि इस केस की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो और अपराधी को जल्द से जल्द फांसी दी जाए।
सुप्रिया सुले की इस मांग ने एक बार फिर महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा और लंबित कानूनों पर बहस छेड़ दी है। मंगलवार को वे अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ मुख्यमंत्री से भी मुलाकात करने वाली हैं, जहां शक्ति कानून और सुरक्षा उपायों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।