

Pune Real Estate Scam Fake Documents FIR: पुणे के रियल एस्टेट में जालसाजी के मामले का पर्दाफाश हुआ है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और संपत्ति खरीदारों के भरोसे को झकझोर दिया है। कुछ बिल्डरों और डेवलपर्स ने पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) के डेवलपमेंट परमिशन (विकास अनुमति), प्रारंभ प्रमाणपत्र (कर्मेसमेंट सर्टिफिकेट सीसी) और पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) के ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट ओसी) जैसे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के फर्जी कागजात तैयार कर लिए।
इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दत्तनगर स्थित हवेली क्रमांक-20 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में 22 संपत्तियों की अवैध रजिस्ट्री तक करा ली गई। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों और आम जनता में हड़कंप मच गया है। मामले में आंबेगांव पुलिस स्टेशन में विभिन्न डेवलपर्स, पार्टनर्स, बिल्डरों और जमीन मालिकों समेत 19 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
सब-रजिस्ट्रार रवींद्र नामदेव कोली की आधिकारिक शिकायत पर आंबेगांव पुलिस ने 'साई स्वराज डेवलपर्स', 'शिवाय एसोसिएट्स', 'श्री व्यंकटेश डेवलपर्स', 'राजलक्ष्मी डेवलपर्स एंड बिल्डर्स' और 'श्री डेवलपर्स' जैसी फमाँ के साझेदारों, बिल्डरों और भू-स्वामियों समेत कुल 19 लोगों पर 'रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 82' और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
यह पूरा फर्जीवाड़ा इसी वर्ष 14 जनवरी, 18 फरवरी और 20 फरवरी के दौरान अंजाम दिया गया। एक सतर्क नागरिक द्वारा पुख्ता सबूतों के साथ की गई शिकायत के बाद जब पीएमआरडीए और मनपा के निर्माण विभाग से इन स्वीकृतियों का भौतिक सत्यापन कराया गया, तब खुलासा हुआ कि ये सभी अनुमति पत्र पूरी तरह जाली थे और संबंधित विभागों द्वारा जारी ही नहीं किए गए थे।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शरद झिने के मार्गदर्शन में पुलिस अब पुणे फर्जी मुहरें और जाली दस्तावेज तैयार करने वाले सिंडिकेट की गहराई से छानबीन कर रही है। हालांकि, इस घटना ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है कि बिना ऑनलाइन क्रॉस वेरिफिकेशन के रजिस्ट्री कैसे संपन्न हो गई?
जानकारों का मानना है कि अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगाकर सपनों का आशियाना खरीदने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति आर्थिक और मानसिक संकट खड़ा करती है।
जब तक रेरा, पुलिस और नगर निकाय मिलकर ऐसे जालसाजों की संपत्तियां जब्त करने जैसी कठोर कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक ऐसी धांधली पर रोक लगना मुश्किल है। हालांकि नियमों की अनदेखी के चलते पिछले 5 वर्षों में 5 से अधिक सब-रजिस्ट्रार व विभागीय अधिकारियों को निलंबित किया गया है और विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है,