Ravet–Wakad Corridor जाम से जूझ रहा, एलिवेटेड कॉरिडोर योजना अटकी

Ravet–Wakad Corridor पर स्थित भूमकर और भुजबल चौक रोजाना भारी जाम का सामना कर रहे हैं। रुकी सड़क चौड़ीकरण परियोजनाएं, अवैध कब्जे और संकरी सड़कें यातायात की सबसे बड़ी वजह बन गई हैं।
Mumbai Bengaluru Highway jam
मुंबई बेंगलुरु हाईवे जाम (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: मुंबई-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर रावेत से बाणेर के बीच, वाकड के पास स्थित भूमकर चौक और भुजबल चौक इन दिनों रोजाना ट्रैफिक जाम का केंद्र बन गए हैं।

सुबह और शाम के व्यस्त समय में इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों और स्थानीय नागरिकों को घंटों भारी मशक्कत करनी पड़ती है। यह मार्ग हिंजवड़ी आईटी पार्क और पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण चौराहा है, जहां आईटी हब, औद्योगिक क्षेत्र और तेजी से बढ़ती रिहायशी आबादी के कारण वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

रुकी परियोजनाएं बनी मुसीबत

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण का रुका हुआ काम, मुला नदी पर संकरा पुल, और सर्विस रोड पर हो रहे अवैध कब्जे ही जाम के मुख्य कारण हैं। एक तरफ रावेत से नहें के बीच 24 किलोमीटर के छह लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है, तो वहीं दूसरी ओर रावेत-वाकड के बीच सर्विस रोड के चौड़ीकरण और कंक्रीटीकरण का काम भी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका की धीमी गति के कारण अधर में लटका है। भूमि-अधिग्रहण की प्रक्रिया सुस्त होने से अंडरपास का विस्तार और सड़क चौड़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य अटके पड़े हैं।

ये हैं जाम के प्रमुख कारण

  • अंडरपास के पास अवैध दुकानें और अनधिकृत रिक्शा/प्राइवेट स्टैंड,
  • अव्यवस्थित तरीके से पार्क की गई गाड़ियां।
  • सड़क किनारे फल विक्रेताओं और उनके वाहनों का जमावड़ा।
  • संबंधित विभागों की धीमी कार्यशैली और लचर ट्रैफिक प्लानिंग।

चौड़ीकरण और अन्य उपायों के लिए वे लगातार फॉलोअप कर रहे हैं, लेकिन विभागों की गभीरता की कमी से जाम बढ़ रहा है। मुठा नदी पर पुल का चौड़ीकरण जल्द पूरा होने पर जाम में कुछ कमी आ सकती है। - राहुल सोनवणे, हिंजवडी ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक

समस्या का स्थायी समाधान संभव

भूमि-अधिग्रहण में तेजी लाकर चौड़ीकरण का काम तुरंत पूरा किया जाए और अवैध कब्जों को हटाया जाए, तभी इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। - स्थानीय नागरिक, बागेर

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