

Raj Thackeray MPSC Protest: MPSC की कार्यप्रणाली, पेपर लीक मामलों और रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं के विरोध में पुणे में चल रहा छात्रों का आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संग्राम में बदल गया है।
पिछले पांच दिनों से पुणे के गरवारे पुल / एस.एम. जोशी पुल पर डटे हजारों परीक्षार्थियों का हौसला उस समय और बढ़ गया, जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे सीधे आंदोलन स्थल पर पहुंचे और छात्रों के साथ मंच साझा किया।
आंदोलनकारी छात्रों की विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने अपने जाने-पहचाने आक्रामक अंदाज में कहा कि वे यहां कोई पारंपरिक राजनीतिक भाषण देने नहीं आए हैं, बल्कि छात्रों के उस आक्रोश का हिस्सा बनने आए हैं जो सालों की अनदेखी और प्रशासनिक धोखे से उपजा है। उन्होंने कहा कि सालों तक मेहनत से पढ़ाई करने के बावजूद परीक्षाएं टल जाती हैं, पेपर लीक हो जाते हैं और नतीजे कोर्ट-कचहरी में अटक जाते हैं।
महाराष्ट्र के युवाओं के रोजगार पर बात करते हुए राज ठाकरे ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने ऐलान किया- यदि महाराष्ट्र के मराठी लड़के-लड़कियों को उनका हक और नौकरियां दिलाने के लिए मुझे किसी के पैर भी पकड़ने पड़े, तो यह राज ठाकरे उसके लिए भी तैयार है। लेकिन युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राज्य सरकार और चुनावी व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए मनसे प्रमुख ने उपरोधिक तंज कसा। उन्होंने कहा- आज देश और प्रदेश में अजीब बेधुंदशाही चल रही है। आपके यहां परीक्षा के पेपर लीक होता हैं और हमारे यहां जनता के दिए हुए वोट लीक होते हैं!
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि उनका यह गुस्सा सिर्फ दो दिन सड़क पर उतरने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जब तक पूरी प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक यह संताप धगधगता रहना चाहिए।
राज ठाकरे ने प्रतियोगी छात्रों को मोलाचा सलाह देते हुए कहा कि वे किसी भी सूरत में जाति-पाति की राजनीति में न उलझें। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता जानबूझकर युवाओं को जातियों में बांटते हैं ताकि बुनियादी मुद्दों और बेरोजगारी से ध्यान भटकाया जा सके।
70 हजार पदों पर भर्ती की मांग पर उन्होंने कड़वी सच्चाई सामने रखते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां हर क्षेत्र के निजीकरण (Privatization) की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी सरकार आ जाए, निजीकरण की नीतियों के कारण 70 हजार सरकारी नौकरियां देना आसान नहीं होगा, लेकिन महाराष्ट्र के संसाधनों और नौकरियों पर पहला हक मराठी युवाओं का ही होना चाहिए।
इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार पिछले पांच दिनों से छात्रों के साथ आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर राज ठाकरे का व्यक्तिगत रूप से आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके समर्थन से संघर्ष कर रहे युवाओं के मनोबल को बहुत बड़ा बल मिला है।