Pune Water Crisis 2026: पुणे में 15% पानी कटौती की तैयारी, जल संकट को लेकर बढ़ी चिंता

Pune Water Crisis 2026: पुणे में संभावित जल संकट को देखते हुए प्रशासन 15 प्रतिशत पानी कटौती या सप्ताह में एक दिन जलापूर्ति बंद रखने पर विचार कर रहा है। प्रशासन जल्द अंतिम निर्णय ले सकता है।
Pune Water Crisis 2026 Update
पुणे में जल संकट (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune Water Crisis 2026 Update: पुणे जिले में इस वर्ष जल संकट गहराने के संकेत मिलने लगे हैं। कालवा सलाहकार समिति की बैठक नहीं होने के कारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के जल नियोजन का मुद्दा उलझ गया है।

एक तरफ पुणे महानगर पालिका पर 15 प्रतिशत पानी कटौती लागू करने का दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों के लिए सिंचाई का पानी लगातार छोड़ा जा रहा है। इस स्थिति ने आने वाले महीनों में जल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

मनपा सूत्रों के अनुसार, खडकवासला डैम श्रृंखला में उपलब्ध जल भंडारण की समीक्षा के बाद अगले दो से तीन दिनों में पानी कटौती को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है।

प्रशासन साप्ताहिक एक दिन पानी आपूर्ति बंद रखने अथवा 15 प्रतिशत कटौती लागू करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। इस संबंध में प्रस्ताव आयुक्त के समक्ष रखा जाएगा, जिसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।

जल संसाधन विभाग की सलाह

  • मौसम विभाग ने इस वर्ष 'अल-निनो' के प्रभाव के चलते सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई है।
  • जून माह में भी अपेक्षाकृत कम बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है।
  • इसी को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने पहले ही मनपा को पानी के संयमित उपयोग और 15 प्रतिशत कटौती लागू करने की सलाह दी थी। हालांकि अब तक प्रशासन ने किसी प्रकार की कटौती लागू नहीं की है। महापौर मंजुषा नागपुरे ने मई माह के अंत तक पानी कटौती नहीं करने की घोषणा की थी।

बैठकें लगातार टलती रहीं

हर वर्ष नवंबर या दिसंबर में पालकमंत्री की अध्यक्षता में कालवा सलाहकार समिति की बैठक आयोजित होती है, जिसमें शहर के पेयजल और किसानों के लिए सिंचाई जल का नियोजन तय किया जाता है। इसी के आधार पर जल संसाधन विभाग पानी का वितरण करता है। लेकिन इस वर्ष स्थानीय निकाय चुनावों की आचार संहिता के कारण यह बैठक लगातार टलती रही। बाद में उपमुख्यमंत्री और पालकमंत्री अजित पवार के विमान दुर्घटना में निधन के कारण बैठक आयोजित नहीं हो सक्ती

कृषि के लिए 7 टीएमसी पानी

इस बीच जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए जिले में ग्रीष्मकालीन सिंचाई आवर्तन जारी रखने का निर्णय लिया। इसके तहत 18 फरवरी से खेती के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। कुल 9 टीएमसी पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी, जिसमें से अब तक लगभग 7 टीएमसी पानी छोड़ा जा चुका है।

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