पुणे में 3000 करोड़ का बॉन्ड प्रस्ताव ठंडे बस्ते में, नाईक बेट भूमि अधिग्रहण पर विवाद

PMC 3000 Crore Bond Proposal Issue: पुणे के नाईक बेट में 3000 करोड़ के रिजर्वेशन क्रेडिट बॉन्ड प्रस्ताव पर विवाद बढ़ गया। जलमग्न जमीन पर परियोजना को लेकर जनप्रतिनिधियों ने विरोध किया।
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पुणे का नाईक बेट (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune Naik Bet Land Bond Controversy: संगमवाड़ी क्षेत्र स्थित नाईक बेट के 36 एकड़ भूखंड के अधिग्रहण को लेकर पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) द्वारा प्रस्तावित 3 हजार करोड़ रुपये का 'रिजर्वेशन क्रेडिट बॉन्ड' विवादों की भेंट चढ़ गया है।

सोमवार को हुई मनपा की आमसभा में इस प्रस्ताव पर जमकर हंगामा हुआ, जिसके बाद प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। जनप्रतिनिधियों के कड़े विरोध और तीखे सवालों के बीच सदन ने सर्वसम्मति से इस महत्वाकांक्षी लेकिन विवादास्पद प्रस्ताव को 'दफ्तरी दाखिल' यानी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है।

साल भर भूखंड रहता है जलमग्न

विवाद की जड़ इस भूखंड की भौगोलिक स्थिति और उस पर थोपे गए आरक्षण में निहित है। विकास नियोजन (डीपी) के अनुसार, नाईक बेट की इस जमीन पर 'उद्यान' का आरक्षण है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि मानसून के दौरान यह पूरा क्षेत्र जलमग्न हो जाता है।

विपक्ष ने सदन में आरोप लगाया कि जो जमीन साल के कई महीने पानी में डूबी रहती है, वहां उद्यान विकसित करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है। ऐसे में जनता के 3 हजार करोड़ रुपये के क्रेडिट बॉन्ड जारी करने का प्रस्ताव केवल एक विशेष बिल्डर को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश प्रतीत होती है।

बिल्डर को फायदा पहुंचाने के आरोप

  • इस मामले का इतिहास भी काफी पेचीदा रहा है। वर्ष 2011 में तत्कालीन विभागीय आयुक्त चोकलिंगम की समिति ने स्पष्ट रूप से कहा था कि यहां उद्यान की आवश्यकता नहीं है और आरक्षण हटा दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने तकनीकी रिपोटों को दरकिनार कर न केवल आरक्षण बरकरार रखा, बल्कि इस दुर्गम टापू तक पहुंचने के लिए एक महंगे फ्लाईओवर का प्रस्ताव भी जोड़ दिया। वर्तमान में जारी 'नदी सुधार परियोजना' ने इस भूखंड की उपयोगिता पर और बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
  • पूर्व महापौर प्रशांत जगताप ने प्रशासन पर तीखा प्रहार करते हुए इसे एक मजाक करार दिया। उन्होंने पूछा कि यदि ऐसी डूब क्षेत्र वाली जमीनों के लिए टीडीआर या क्रेडिट बॉन्ड दिए जा रहे हैं, तो क्या भविष्य में प्रशासन चांद पर भी टीडीआर देने के प्रस्ताव लाएगा? सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने एक सुर में कहा कि जब शहर की बुनियादी सुविधाओं के लिए फंड की कमी है, तो ऐसे अव्यावहारिक प्रोजेक्ट पर इतनी बड़ी राशि खर्च करना वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन है। भारी विरोध के बाद अब इस योजना पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है।
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