Pune Municipal Corporation में अव्यवस्था उजागर, 4,188 संपत्तियों का रिकॉर्ड गायब, टैक्स वसूली में गिरावट

Property Tax Collection Drop: पुणे मनपा में 4188 संपत्तियों का रिकॉर्ड गायब है, वहीं टैक्सपेयर्स की संख्या बढ़ने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन में 300 करोड़ रुपये की गिरावट ने सवाल खड़े किए हैं।
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Pune Municipal Property Tax Record: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) के प्रशासन में इन दिनों भारी अव्यवस्था का माहौल दिखाई दे रहा है।

जहां एक ओर पुणे महानगर पालिका की अपनी हजारों करोड़ की संपत्तियों का कोई कानूनी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, वहीं दूसरी ओर करदाताओं की संख्या बढ़ने के बावजूद प्रॉपर्टी टैक्स (संपत्ति कर) की वसूली में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई है। ये दोनों ही मामले मनपा की वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

निजी संस्थाओं के कब्जे में कई संपत्तियां

पहला चौंकाने वाला मामला महानगर पालिका के स्वामित्व वाली संपत्तियों से जुड़ा है। पूर्व नगरसेविका तन्वी दिवेकर द्वारा मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ है कि मनपा के अधिकार क्षेत्र में आने वाली 4,188 संपत्तियों का प्रॉपर्टी कार्ड में कोई रिकॉर्ड नहीं है।

भू-माफिया के अतिक्रमण का खतरा, कई संपत्तियां बेनामी

शहर के प्राइम लोकेशंस पर स्थित इन संपत्तियों का उपयोग प्रशासनिक भवनों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए किया जा रहा है, जबकि कई संपत्तियां निजी संस्थाओं को किराए पर दी गई हैं। रिकॉर्ड न होने के कारण कारण इन इन बेशकीमती जमीनों और इमारतों पर भू-माफिया के अतिक्रमण या अवैध उपयोग का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, कानूनी दस्तावेजों के अभाव में इन संपत्तियों को एक तरह से 'बेनामी' माना जा रहा है। प्रशासन की इस लापरवाही के कारण भविष्य में इन संपत्तियों पर अपना कानूनी दावा साबित करना मनपा के लिए मुश्किल हो सकता है।

मनपा क्षेत्र में प्रॉपर्टी मालिकों की संख्या में 40 हजार की वृद्धि

मनपा के राजस्व का 'प्रॉपर्टी टैक्स विभाग' भी सवालों के घेरे में है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि संपत्ति धारकों की संख्या में 40 हजार की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके बावजूद टैक्स कलेक्शन में 300 करोड़ रुपये की गिरावट आई है।

सजग नागरिक मंच के अध्यक्ष विवेक वेलणकर ने बताया कि मार्च 2026 तक मनपा को 11.33 लाख करदाताओं से कुल 2,985 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। हालांकि, इस राशि में 'अभय योजना' (छूट योजना) के तहत जमा हुए 955 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।

राजस्व घटाः 'अभय योजना' बनी बाधा ?

तुलनात्मक रूप से देखें तो वर्ष 2024-25 में 10।95 लाख करदाताओं से 2,346 करोड़ रुपये वसूले गए थे। करदाताओं का आधार बढ़ने के बावजूद राजस्व में भारी कमी आई है। बार-बार लाई जाने वाली 'अभय योजना' के कारण ईमानदार करदाताओं का मनोबल गिर रहा है। लोग इस उम्मीद में टैक्स भुगतान टालने लगते हैं कि भविष्य में कोई माफी योजना आएगी।

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