पुणे: बिल्डरों पर शिकंजा, महारेरा मामलों में अब नहीं चलेगी देरी, 7 दिन में तहसीलदार तक पहुंचेगा रिकवरी वारंट

MahaRERA Recovery Warrants मामलों के निपटारे के लिए सभी जिलों में सात दिन के भीतर कार्रवाई और सख्त निगरानी से घर खरीदारों की गाढ़ी कमाई की जल्द वसूली और त्वरित न्याय का रास्ता साफ होगा।
MahaRERA Recovery Warrants
महारेरा रिकवरी वारंट पर सख्ती(सोर्स: AI)
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MAHA REAL ESTATE REGULATORY AUTHORITY: महाराष्ट्र के घर खरीदारों के हितों की रक्षा और बिल्डरों द्वारा रोकी गई धनराशि की वापसी के लिए राजस्व विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। 'महारेरा' के रिकवरी वारंट के लंबित मामलों को निपटाने के लिए सभी जिलों के निवासी उपजिलाधिकारियों को 'समर्पित राजस्व वसूली अधिकारी' बनाया गया है।

इस निर्णय से उन खरीदारों को त्वरित न्याय मिलेगा, जिन्हें फैसला पक्ष में आने के बाद भी बिल्डरों से पैसा नहीं मिल पा रहा था। पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ऐसे सैकड़ों मामले लंबे समय से लंबित थे।

प्रशासनिक सुस्ती पर नकेल

सरकार के इस कदम से प्रशासनिक सुस्ती पर नकेल कसेगी। राजस्व विभाग के सह-सचिव कैलास गायकवाड़ द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह नागरिकों की गाढ़ी कमाई और उनके सपनों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है।

नई व्यवस्था के तहत, जिलाधिकारी कार्यालय में वारंट मिलते ही उसकी विशेष रजिस्टर में प्रविष्टि होगी। मामले की जांच कर निवासी उपजिलाधिकारी को मात्र सात दिनों के भीतर फाइल संबंधित तहसीलदार के पास भेजनी होगी।

तहसीलदार के पास अधिकार

तहसीलदार बकाएदार बिल्डरों की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक नीलामी के जरिए रकम वसूल कर पीड़ित ग्राहकों को उनकी बकाया राशि लौटाई जाएगी। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति बनाए रखने के लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली भी स्थापित की गई है।

वसूली की प्रगति और लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट हर महीने की पांच तारीख तक राज्य सरकार के पास अनिवार्य रूप से जमा करानी होगी। इस सख्त प्रशासनिक व्यवस्था से अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और घर खरीदारों का पैसा वापस मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

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घर खरीदारों को मिलेगा न्याय

महाराष्ट्र राजस्व विभाग के सह-सचिव कैलास गायकवाड़ ने कहा कि महारेरा से जुड़े रिकवरी वारंट मामलों में अब कार्रवाई को तेज किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत वारंट मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सात दिनों के भीतर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

उन्होंने कहा कि घर खरीदारों की गाढ़ी कमाई और उनके सपनों का घर एक संवेदनशील विषय है, इसलिए ऐसे मामलों में प्रशासनिक देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सख्त निगरानी व्यवस्था के जरिए लंबित मामलों की लगातार समीक्षा की जाएगी।

अधिकारियों की जवाबदेही तय होने से बिल्डरों से बकाया राशि की वसूली में तेजी आएगी और लंबे समय से अपने पैसे का इंतजार कर रहे घर खरीदारों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है।

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