Pune MLC Election Result: शिक्षक सीट पर BJP के कौस्तुभ गावडे जीते, स्नातक सीट पर हर्षदा देशमुख-जाधव का कब्जा

Pune MLC Election Results: पुणे MLC चुनाव में शिक्षक सीट से BJP के कौस्तुभ गावडे विजयी रहे, जबकि स्नातक सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) की हर्षदा देशमुख-जाधव ने बाजी मारी।
BJP's Kaustubh Gawde on Pune teacher seat
पुणे एमएलसी चुनाव परिणाम कौस्तुभ गावडे हर्षदा देशमुख जयंत पाटिलफोटो सोर्स- नवभारत
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Highlights

  • पुणे शिक्षक सीट पर भाजपा के कौस्तुभ गावडे, स्नातक सीट पर हर्षदा जाधव जीतीं।

  • जयंत पाटिल ने नतीजों को सरकार के खिलाफ जनादेश बताया।

  • बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षकों के मुद्दे चुनाव में चर्चा में रहे।

Maharashtra Politics News: महाराष्ट्र विधान परिषद के पुणे विभाग की शिक्षक और स्नातक सीटों के नतीजों ने राजनीतिक तस्वीर में दो अलग-अलग संदेश दिए हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कौस्तुभ गावडे ने जीत दर्ज कर पार्टी को सफलता दिलाई, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख जाधव ने बाजी मारी।

स्नातक सीट पर पहली पसंद के मतों से जीत का कोटा पूरा नहीं होने के कारण वरीयता क्रम के मतों की गिनती करनी पड़ी। पुणे विभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कौस्तुभ गावडे ने निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को पराजित किया। मतगणना के 27वें राउंड की गणना के बाद गावडे को 20,118 वोट मिले थे।

सचिन सानप को 13,642 और निर्दलीय उम्मीदवार दत्तात्रय सावंत को 12,687 वोट प्राप्त हुए थे। इस चरण में गावडे ने सानप पर 6,476 वोटों की बढ़त बनाई थी। अंतिम मतगणना पूरी होने के बाद उनकी जीत पर मुहर लगी। कांग्रेस के मौजूदा विधायक जयंत आसगावकर चौथे स्थान पर रहे। जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने गुलाल उड़ाकर और नारेबाजी कर जश्न मनाया। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हर्षदा देशमुख-जाधव और भाजपा की डॉ. स्मिता जाधव के बीच मुकाबला रहा।

मतगणना के 39वें राउंड के बाद हर्षदा को 1,11,717 वोट मिले थे, जबकि डॉ. स्मिता जाधव को 1,02,797 वोट प्राप्त हुए थे। इस चरण में हर्षदा 8,920 वोटों से आगे थीं। पहली पसंद के मतों की गिनती में निर्धारित 1,13,095 वोटों का कोटा पूरा नहीं होने के कारण वरीयता क्रम के मतों की गिनती की गई। इस प्रक्रिया के बाद हर्षदा देशमुख-जाधव की जीत हुई।

एमएलसी चुनाव के नतीजों से बदले सियासी समीकरण

पुणे विभाग की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन सीटों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कौस्तुभ गावडे की जीत से पार्टी को राहत मिली, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में महाविकास आघाड़ी की हर्षदा देशमुख जाधव की सफलता ने भाजपा की चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दूसरी ओर, शिक्षक सीट पर कांग्रेस के मौजूदा विधायक जयंत आसगावकर की हार पार्टी के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। इन नतीजों ने स्पष्ट किया है कि दोनों सीटों पर मतदाताओं का रुझान अलग-अलग रहा और किसी एक दल को एकतरफा बढ़त नहीं मिली।

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जयंत पाटिल बोले- सरकार के खिलाफ जनादेश

  • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता जयंत पाटिल ने पुणे और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों को सरकार के खिलाफ जनादेश बताया।

  • उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की समस्याओं का असर मतदान पर दिखाई दिया है।

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  • सरकार को इन नतीजों से मिले संकेतों को गंभीरता से समझना चाहिए। मतगणना में 30 घंटे से अधिक समय लगने के सवाल पर जयंत पाटिल ने कहा कि प्राथमिकता क्रम से मतदान होने के कारण प्रक्रिया लंबी होती है।

  • निर्धारित कोटा पूरा होने तक मतों की गिनती आवश्यक होती है। उन्होंने प्रशासन के कामकाज की सराहना करते हुए उसे दोष देने से इनकार किया।

  • साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी बैलेट पेपर के माध्यम से कराने का निर्णय लेने की अपील की।

शिक्षकों ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरने के लिए उनके मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का प्रयास करूंगा। चरणबद्ध अनुदान, गैर-अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों की समस्याओं और पुरानी पेंशन जैसे मुद्दों पर शिक्षकों को दोबारा आंदोलन करने की नौबत न आए, इसके लिए प्रयासरत रहूंगा।

कौस्तुभ गावडे, भाजपा

प्रेफरेंशियल वोटिंग की प्रक्रिया लंबी थी और जीत के लिए 1 लाख 13 हजार वोटों का कोटा पूरा करना जरूरी था। खुशी है कि हमने बड़े अंतर से यह लक्ष्य हासिल किया। कार्यकर्ताओं और बूथ एजेंटों ने भी पूरी ताकत से काम किया। यह चुनाव जनता ने अपने हाथ में लिया था। इसी जनसमर्थन और कार्यकर्ताओं की मेहनत के कारण हमें बड़ी जीत मिली।

हर्षदा जाधव, राका (शरदचंद्र पवार)

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