

Pune Faces Infrastructure Challenge: शहर और उपनगरों में अगले चार वर्षों में करीब 65 मिलियन वर्गफुट यानी 6.5 करोड़ वर्गफुट नया निर्माण होने का अनुमान है। आईटी, डेटा सेंटर और आवासीय क्षेत्र के तेजी से विस्तार के बीच शहर के सामने अब विकास को संभालने वाली बुनियादी सुविधाएं तैयार करने की सबसे बड़ी चुनौती है।
यदि निर्माण की रफ्तार के अनुरूप सड़क, जलापूर्ति और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में पुणे की यातायात व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ सकता है। साथ ही, पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में शहर में निवेश और नए उद्योगों के विस्तार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
पुणे महानगरपालिका आयुक्त नवल किशोर राम ने बताया कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। एक उच्चस्तरीय बैठक में पुणे शहर और उपनगरों में अगले कुछ वर्षों में होने वाले संभावित निर्माण तथा इसके लिए आवश्यक सुविधाओं का अध्ययन प्रस्तुत किया गया।
मनपा सीमा में ही अगले चार वर्षों में 6.5 करोड़ वर्गफुट निर्माण की संभावना है। आयुक्त राम के अनुसार, 'हाई-राइज बिल्डिंग कमेटी' की एक बैठक में ही करीब 50 से 60 लाख वर्गफुट निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर निर्णय लिया जा रहा है। इसका अर्थ है कि शहर में ऊंची इमारतों और बड़े निर्माण प्रकल्पों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
निर्माण के साथ बढ़ती आबादी की पानी की जरूरत पूरी करना भी बड़ी चुनौती है। प्रशासन ने 12 गांवों के लिए करीब 890 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। अगले 10 दिनों में इसके लिए निविदा जारी करने की तैयारी है और आरएफपी तैयार कर लिया गया है।
खड़कवासला क्षेत्र में जलशुद्धिकरण परियोजना स्थापित कर इन 12 गांवों को पानी उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना की अतिरिक्त क्षमता का इस्तेमाल चार और गांवों को पानी देने के लिए किया जा सकता है। वहीं, शेष 13 गांवों के लिए करीब 1,500 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई है।
आयुक्त नवल किशोर राम ने कहा कि अगले चार वर्षों में करीब 6.5 करोड़ वर्गफुट निर्माण होने की संभावना है। ऐसे में सड़क, तो जलापूर्ति और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास भी उसी गति से करना जरूरी है। उद्योगों को समय पर आवश्यक बुनियादी सुविधाएं और पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, शहर के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अभी से नियोजन और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर जोर दिया जा रहा है। पुणे में निर्माण की यह रफ्तार पुणे शहर की आर्थिक क्षमता का संकेत है, लेकिन इसे संभालने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना अब प्रशासन की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी।
शहर के बढ़ते विस्तार के बीच सक्षम सड़क नेटवर्क तैयार करना प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकता बन गया है। डीपी रोड, मिसिंग लिंक, एचसीएमटीआर और पुणे इनर रिंग रोड जैसी परियोजनाओं को समय पर पूरा नहीं किया गया, तो नए निर्माण के कारण यातायात व्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है।
धायरी डीपी रोड के लिए भूमि अधिग्रहण को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 10 से 12 महत्वपूर्ण सड़कों के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। पुणे इनर रिंग रोड की कुल लंबाई करीब 83 किलोमीटर है। यह पीएमआरडीए और मनपा की सीमा से होकर गुजरेगा। दोनों संस्थाओं की सीमा में 21-21 गांव शामिल हैं।