पुणे की क्लीनटेक कंपनी नोवॉर्बिस इटस ने रेनमैटर और रॉकस्टड से जुटाई ₹13.35 करोड़ की पूंजी

पुणे के क्लीनटेक स्टार्टअप नोवॉर्बिस ने रेनमैटर के नेतृत्व में ₹13.35cr जुटाए। यह राशि DG सेट्स व श्मशान घाटों के प्रदूषण नियंत्रण और कार्बन कैप्चर तकनीक विस्तार में खर्च होगी।
Pune-based cleantech company Novarbus Itus has raised ₹13.35 crore in capital from Rainmatter and Rockstud.
Pune Cleantech Startup
Published on
Updated on

Pune Cleantech Startup: पुणे स्थित क्लीनटेक स्टार्टअप नोवॉर्बिस इटस प्राइवेट लिमिटेड ने सीड फंडिंग राउंड में ₹13.35 करोड़ जुटाए हैं। इस निवेश राउंड का नेतृत्व ज़ेरोधा की निवेश पहल रेनमैटर ने किया। कंपनी डीज़ल जनरेटर (डीजी) सेट्स और श्मशान घाटों जैसे अलग-अलग जगहों पर होने वाले प्रदूषण को कम करने और हवा साफ करने वाले सिस्टम बनाती है, जिसमें मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रेट्रोफिट समाधान भी शामिल हैं। इस फंडिंग राउंड में मैन्युफैक्चरिंग आधारित कंपनियों पर फोकस करने वाले शुरुआती चरण के फंड रॉकस्टड कैपिटल ने भी भागीदारी की। इस लेनदेन पर सलाह इंडोरिएंट फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने दी।

नई पूंजी का इस्तेमाल

नई पूंजी का इस्तेमाल कंपनी अपने मौजूदा समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने, अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करने और बॉयलर व स्टील प्लांट्स जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने वाले नए समाधान विकसित करने में करेगी। इसके साथ ही यह उद्योगों को अपने परिसर में ही कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी अपनाने में मदद करेगी।

नोवॉर्बिस इटस का परिचय

नोवॉर्बिस इटस की स्थापना हर्ष नीखरा, गगन त्रिपाठी और दिव्यांक गुप्ता ने की थी। कंपनी का पहला प्रोडक्ट फिल्टर-लेस रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (आरईसीडी) था, जिसे मौजूदा डीज़ल जनरेटर (डीजी) सेट्स में लगाया जा सकता है। इससे कंपनियां मशीन बदले बिना ही उत्सर्जन मानकों का पालन कर सकती हैं। इसके बाद कंपनी ने श्मशान घाटों के लिए क्रेमेटोरियम एयर प्यूरिफिकेशन सिस्टम (कैप्स) नाम का प्रोडक्ट लॉन्च किया।

टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य

सीईओ हर्ष ने कहा, “हमने इंदौर में कॉलेज के दूसरे वर्ष के छात्र रहते हुए नोवॉर्बिस इटस की शुरुआत इस सोच के साथ की थी कि प्रदूषण को उसकी जड़ से कम किया जाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए साफ हवा छोड़ी जाए। पिछले कुछ वर्षों में हमने इस सोच को ऐसे समाधानों में बदला है, जिनका इस्तेमाल आज भारत में औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में किया जा रहा है। इस निवेश के साथ हमारा लक्ष्य अपनी टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर पहुंचाना, अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करना और उन सेक्टर्स में तेजी से अपनाव बढ़ाना है, जहां अब तक उत्सर्जन नियंत्रण पर सीमित काम हुआ है।”

इन्वेस्टमेंट लीड अभिनव नेगी का कथन

रेनमैटर में क्लाइमेट और डीप-टेक के इन्वेस्टमेंट लीड अभिनव नेगी ने कहा, “रेनमैटर में हम ऐसे मुद्दों पर निवेश करते हैं, जो गंभीर हैं, साफ तौर पर दिखते हैं और जिन पर अब तक पर्याप्त काम नहीं हुआ है। डीज़ल जनरेटर सेट्स से होने वाला उत्सर्जन और श्मशान घाटों से निकलने वाला प्रदूषण, दोनों ही ऐसे मुद्दे हैं। नोवॉर्बिस भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से बनी टेक्नोलॉजी के जरिए इन समस्याओं का समाधान कर रही है, जहां वैश्विक समाधान ज्यादा असरदार साबित नहीं हुए।

हमें सिर्फ कंपनी के प्रोडक्ट पर नहीं, बल्कि उसकी टीम पर भी भरोसा है। हर्ष नीखरा, गगन त्रिपाठी और दिव्यांक गुप्ता ने कॉलेज के दिनों में इसकी शुरुआत की और हार्डवेयर बिजनेस की तमाम चुनौतियों के बावजूद लगातार आगे बढ़ते रहे। यही लगातार मेहनत, जमीनी स्तर पर सफल इस्तेमाल और मजबूत होते नियम-कायदों का समर्थन हमें इस कंपनी के साथ खड़े होने का भरोसा देता है।”

कंपनी पर भरोसा

रॉकस्टड कैपिटल के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर अभिषेक अग्रवाल ने कहा, “रॉकस्टड कैपिटल में हम ऐसी मैन्युफैक्चरिंग आधारित कंपनियों में निवेश करते हैं, जो बड़े स्तर पर असल समस्याओं का समाधान करती हैं। नोवॉर्बिस इस मामले में अलग नजर आती है, क्योंकि कंपनी ने उत्सर्जन नियंत्रण के क्षेत्र में प्रमाणित और व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किए जा सकने वाला समाधान तैयार किया है।

यह ऐसा क्षेत्र है, जहां अब तक पर्याप्त काम नहीं हुआ, लेकिन इसकी जरूरत लगातार बढ़ती जा रही है। उत्सर्जन नियम सख्त होने और निगरानी बढ़ने के साथ नोवॉर्बिस के आरईसीडी जैसे रेट्रोफिट समाधान अब जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनते जा रहे हैं। हमें भरोसा है कि कंपनी की टीम औद्योगिक और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़े स्तर पर विस्तार करने की मजबूत स्थिति में है।”

Navbharat Live
navbharatlive.com