PMRDA का 'दिखावा' बेनकाब! होर्डिंग पर चला बुलडोजर, बगल में खड़ी अवैध इमारतों को मिला अभयदान? कार्रवाई पर सवाल

PMRDA Enforcement Action: पीएमआरडीए की कार्रवाई पर उठे सवाल। हिंजवड़ी में होर्डिंग तो गिराए पर अवैध निर्माणों को मिला 'अभयदान'। प्रशासन पर भेदभाव और मिलीभगत के गंभीर आरोप।
PMRDA faces criticism for selective action in Hinjewadi. While illegal hoardings are removed, massive illegal constructions remain untouched.
महानगर आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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PMRDA Illegal Construction in Hinjewadi: पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (PMRDA) द्वारा हिंजवड़ी इलाके में की गई हालिया कार्रवाई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार को प्रशासन ने एक अवैध होर्डिंग को तो जमींदोज कर दिया, लेकिन इस कार्रवाई की मंशा पर स्थानीय लोगों ने संदेह व्यक्त किया है।

चर्चा है कि प्रशासन का ध्यान केवल उन्हीं अवैध होर्डिंग्स पर है, जो मुख्य सड़कों पर दिखाई देते हैं, जबकि उन्हीं के पीछे धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माणों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। हिंजवड़ी, मान और मारुंजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिन पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय अधिकारियों ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। इसी कारण प्रशासन पर 'चुनकर कार्रवाई' करने और भेदभाव बरतने के आरोप लग रहे हैं।

जेल-जुर्माने की चेतावनी का असर नहीं

PMRDA के सहआयुक्त हिम्मत खराडे ने अवैध होर्डिंग धारकों को जेल और जुर्माने की चेतावनी दी है, लेकिन अवैध इमारतों पर ऐसी सख्ती कब दिखेगी, इसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। प्रशासन को इन निर्माणों की पूरी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई न होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। एक तरफ छोटे होर्डिंग्स पर बुलडोजर चल रहे हैं, तो दूसरी तरफ बड़े भू-माफिया धड़ल्ले से नियमों का उल्लंघन कर रहे है, जिस पर प्रशासन की आंखें बंद है।

जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस

महानगर आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी के सख्त निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। अतिक्रमण निरोधक विभाग ने हिंजवड़ी के गट नंबर 206 में करीब 1250 वर्गफुट के अवैध होर्डिंग ढांचे को हटाकर अपनी सक्रियता दिखाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यह केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई है।

यहां कब होगी तोड़क कार्रवाई?

आईटी पार्क जैसे संवेदनशील इलाके में हजारों अवैध इमारते है और नए निर्माण भी बेरोकटोक जारी है। पहले बड़े स्तर पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए गए थे, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही यह मुहिम ठंडी पड़ गई। आज स्थिति इतनी विकट है कि कई इलाकों में संकरी सड़कों से एम्बुलेंस या दमकल जैसी आपातकालीन सेवाओं का पहुंचना भी लगभग नामुमकिन हो गया है।

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