पीएमआरडीए (सौ. सोशल मीडिया )
PMRDA Development Plan Crisis: पुणे महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) के कार्यक्षेत्र में विकास की गति पूरी तरह ठप हो गई है।
राज्य सरकार की नीतिगत अनिश्चितता और परस्पर विरोधी आदेशों के जाल में फंसकर 7 हजार वर्ग किलोमीटर के डेवलपमेंट प्लान (डीपी) के प्रभावित होने का खतरा है।
सरकार द्वारा पहले ग्राम विकास योजना को स्थगित करने और अब गांवों के सुनियोजित विकास के लिए अनिवार्य ‘स्ट्रक्चरल प्लान’ पर प्रतिबंध लगाने से करोड़ों रुपये की कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के आसपास के नौ तहसीलों में नए सड़क निर्माण, फ्लाईओवर और बुनियादी सुविधाओं के कार्य पूरी तरह बंद पड़े हैं, जिससे क्षेत्र के सुनियोजित शहरीकरण पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
पीएमआरडीए ने इस विशाल क्षेत्र के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी डेवलपमेंट प्लान तैयार किया था, लेकिन शुरुआत से ही यह विवादों के घेरे में रहा। मुख्यमंत्री और पीएमआरडीए के अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस द्वारा इस प्लान को रद्द किए जाने के बाद जो गतिरोध पैदा हुआ, और भी पेचीदा हो गया।
समाधान के रूप में यह तय हुआ था कि पहले एक स्ट्रक्चरल प्लान बनाया जाएगा, विस्तृत विकास योजना पर काम शुरू होगा। नगर रचना विभाग के विशेषज्ञों की नियुक्ति भी की गई थी, लेकिन वर्तमान प्रतिबंधों ने इन सभी प्रयासों पर पानी फेर दिया है।
हिंजवडी मेट्रो परियोजना की रफ्तार सुस्त है, तो वहीं, प्राधिकरण क्षेत्र के 29 महत्वपूर्ण स्थानों पर प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और 20 स्थानों पर बनने वाले अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन केंद्रों का काम भी ठप है। इंद्रायणी, पवना और मुला नदी सुधार परियोजनाएं भी अनिश्चितता के भंवर में फंसी हैं।
ये भी पढ़ें :- कोथरुड में धूल प्रदूषण पर PMC की बड़ी कार्रवाई, निर्माण प्रोजेक्ट पर तत्काल रोक
लोणावला के टाइगर पॉइंट पर बनने वाला बहुचर्चित ‘ग्लास स्काय वॉक’ और सेक्टर 12 का दुग्ध संकुल गृहप्रकल्प भी नीतिगत अस्पष्टता की भेंट चढ़ गया है। हिंजवड़ी में प्रस्तावित पुलों का निर्माण रुकने से वहां यातायात की समस्या और विकराल होने की आशंका है।