

NCAP 15th Finance Commission Unspent Funds Pune: पुणे शहर की आबोहवा सुधारने के लिए उपलब्ध कराए गए 105.25 करोड़ रुपये के भारी-भरकम फंड को दबाकर बैठी पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) पर अब उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने की तलवार लटक गई है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) और 15वें वित्त आयोग के तहत मिले इस अप्रयुक्त फंड को जल्दबाजी में किसी बेअसर योजना पर बहाने के बजाय ठोस और वास्तविक प्रदूषण विरोधी उपायों पर लगाने की मांग 'पुणे एयर एक्शन हब' ने मनपा आयुक्त नवल किशोर राम से की है।
वहीं, राज्य के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने अल्टीमेटम जारी करते हुए मनपा को 5 सितंबर तक निधि के इस्तेमाल का प्रमाण पत्र सौंपने के सख्त निर्देश दिए हैं।
पुणे में वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत निधि मंजूर की गई थी। मनपा के अनुसार, अब तक 166.24 करोड़ रुपये में से सिर्फ 61 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके हैं, जबकि 105.25 करोड़ रुपये अब भी अनछुए पड़े हैं।
समयसीमा करीब आने से इस फंड को बेअसर योजनाओं में खपाने की आशंका बढ़ गई है। 'पुणे एयर एक्शन हब' ने मांग की है कि खर्च का आधार आंकड़े, प्रदूषण के प्रमुख स्रोत, निर्धारित लक्ष्य और समयबद्ध कार्ययोजना होनी चाहिए।
हब की प्रमुख सिफारिशों में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और जहरीला धुआं उगलने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा, खुले में कचरा जलाने पर रोक, दंडात्मक कार्रवाई और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का कड़ाई से पालन कराने पर जोर दिया गया है।
श्मशानभूमियों में सुधार और पुणे मनपा में स्वतंत्र' एयर क्वालिटी सेल' गठित करने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि निगरानी और अंतर-विभागीय समन्वय बेहतर हो सके।
हब के सदस्यों ने निधि का इस्तेमाल दिखावटी योजनाओं के बजाय जमीनी स्तर पर असरदार उपायों पर करने की मांग की है। 'वॉरियर मॉम्स' की सदस्य हेमा चारी ने 'मिस्ट फाउंटेन' को बेफिजूल खर्च का उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे प्रदूषण कम होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है।
इसलिए भविष्य में किसी भी योजना को मंजूरी से पहले उसके परिणामों का आकलन जरूरी है। वहीं हब सदस्य रविंद्र सिन्हा ने पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट (ईएसआर) के सुझावों को सख्ती से लागू करने पर बल दिया।
निधि खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करे प्रशासन 'पुणे एयर एक्शन हब' ने मांग की है कि शेष 105.25 करोड़ रुपये के इस्तेमाल की योजना को अंतिम रूप देने से पहले उसे सार्वजनिक किया जाए। नागरिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों से चर्चा के बाद ही बजट को मंजूरी दी जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और वाकई असरदार योजनाओं को प्राथमिकता मिले।