पुणे मनपा में निजी अस्पतालों पर फूटा गुस्सा, शव रोकने और मरीजों को लौटाने पर 10 दिन में होगी सख्त कार्रवाई
Pune Health News: पुणे मनपा की बैठक में गरीब मरीजों को लौटाने और शव रोकने वाले निजी अस्पतालों पर नगरसेवकों ने नाराजगी जताई। मनपा प्रशासन ने दोषी अस्पतालों पर 10 दिन में कार्रवाई की बात कही।
- Written By: रूपम सिंह
पुणे मनपा प्रतिकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Pune Municipal Corporation General Body Meeting: पुणे शहरी गरीब योजना तथा अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं लागू होने के बावजूद निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों को भर्ती करने से इनकार करने, भारी जमा राशि मांगने और बिल बकाया होने पर मृतकों के शव रोककर रखने जैसी गंभीर शिकायतों को लेकर बुधवार को पुणे महानगर पालिका (मनपा) की जनरल बॉडी में तीखी बहस हुई। नगरसेवकों ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।
बेड न होने का बनाया जाता है बहाना
इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए नगरसेवक धीरज घाटे ने कहा कि मनपा द्वारा रेफर किए गए गरीब और जरूरतमंद मरीजों को कई निजी अस्पताल भर्ती करने से मना कर देते हैं। अस्पताल प्रबंधन अक्सर बेड उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर मरीजों को वापस लौटा देता है, जबकि वास्तविक स्थिति कुछ और होती है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सदन में कई नगरसेवकों ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के साथ निजी अस्पताल भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहे हैं। आपातकालीन स्थिति में भी मरीजों से बड़ी रकम जमा कराने की मांग की जाती है। इतना ही नहीं, कई मामलों में अस्पतालों द्वारा बिल का भुगतान नहीं होने तक मृतकों के शव परिजनों को सौंपने में देरी करने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
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पुणे नगरसेवकों ने प्रशासन से पूछा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ अब तक कितनी कार्रवाई की गई है और कितने अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली की निगरानी और शिकायतों के निवारण के लिए एक विशेष स्वास्थ्य समिति गठित करने की मांग भी की गई।
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बैठक में प्रभारी स्वास्थ्य प्रमुख वैशाली जाधव ने आश्वासन दिया कि निजी अस्पतालों की जल्द ही आपात बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें सभी शिकायतों और मुद्दों की समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट आगामी जनरल बॉडी बैठक में प्रस्तुत की जाएगी।
सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सूर्यकांत देवकर ने कहा कि आर्थिक कारणों से मरीजों को इलाज से वंचित करने वाले अस्पतालों को मनपा के एम-पैनल से हटाने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पुणे मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों की अगले 10 दिनों के भीतर सुनवाई कर उनसे स्पष्टीकरण और विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
