Pune Municipal Corporation: पुणे महानगरपालिका ने सिंहगढ़ रोड क्षेत्र के जीबीएस प्रभावित 12 गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत करने के लिए 894 करोड़ रुपये की वृहद योजना पर काम तेज कर दिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को दूषित पानी की समस्या से स्थायी राहत दिलाना और क्षेत्र में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है।
मनपा प्रशासन ने वर्ष 2017 के बाद मनपा सीमा में शामिल किए गए 32 गांवों में अगले दो वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए करीब 2,000 करोड़ रुपये के समग्र विकास नियोजन प्रस्ताव को मंजूरी दी जा चुकी है।
पिछले वर्ष दूषित जलापूर्ति के कारण गुलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के मामले सामने आने के बाद किरकटवाड़ी, धायरी, नांदेड और नहें समेत 12 गांवों की जलापूर्ति योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। योजना के जरिए इन क्षेत्रों में सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने की तैयारी है।
योजना के तहत पानी की मुख्य और वितरण जलवाहिनियां बिछाई जाएंगी। इसके साथ ही जलशोधन केंद्र और जैकवेल का निर्माण किया जाएगा तथा विभिन्न स्थानों पर पानी की टंकियां स्थापित की जाएंगी। टंकियों के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए 30 से अधिक स्थानों की जमीन खरीदने के वास्ते सार्वजनिक सूचना जारी की गई है।
पुणे शहर की सीमा में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से वर्षा जल निकासी के कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा 750 करोड़ रुपये की लागत से सात गांवों में सीवेज प्रबंधन योजनाएं भी लागू की जा रही हैं।
जलापूर्ति, सीवेज और जल निकासी से जुड़े इन विकास कार्यों से वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों में नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। पुणे मनपा का लक्ष्य नए शामिल गांवों में चरणबद्ध तरीके से आवश्यक शहरी सुविधाओं का विस्तार करना है।