

PMC General Body Meeting Water Crisis: पुणे शहर में लगातार गहराते जल संकट और टैंकर चालकों की मनमानी को लेकर पुणे महानगर पालिका की सामान्य सभा में मंगलवार को भारी हंगामा देखने को मिला। बैठक शुरू होते ही विपक्षी दलों के नगरसेवकों ने पानी सप्लाई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए, नगरसेवकों ने आरोप लगाया कि निजी टैंकर संचालक शहर में खुलेआम पानी की कालाबाजारी कर रहे हैं और मनपा प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
महापौर मंजुषा नागपुरे ने प्रशासन को निजी टैंकरों की दरों को तुरंत नियंत्रित करने और भूजल स्रोतों के नियमन के निर्देश दिए। उन्होंने पारदर्शी तरीके से पानी उपलब्ध कराने के लिए एक नई और ठोस नीति बनाने के कड़े आदेश भी जारी किए। मगरपट्टा और चतुश्रृंगी में हाहाकार, नहीं जाता एक भी टैंकर पानी
सदन में पानी की किल्लत और टैंकर व्यवस्था पर चर्चा की शुरुआत नगरसेवक सतीश लोंढे के सवाल से हुई। इसके बाद कई नगरसेवकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की जल समस्याएं सामने रखीं, नगरसेवक पुनीत जोशी ने आरोप लगाया कि पटवर्धन बाग टैंकर प्वाइंट से रोजाना 50 से 60 टैंकर पानी भरा जाता है, जिसे निजी लोगों को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
उन्होंने सरकारी टैंकरों को प्राथमिकता देने और निजी टैंकरों पर रोक लगाने की मांग की। दूसरी तरफ, नगरसेविका हेमलता मगर ने शिकायत की कि मगरपट्टा सिटी में गंभीर जल संकट है, लेकिन वहां एक भी टैंकर नहीं भेजा जाता। अधिकारी इस समस्या पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। दत्तात्रेय बहिरट ने चतुश्रृंगी टैंकर प्वाइंट पर निजी टैंकरों की लंबी कतारों पर आपत्ति जताते हुए सख्त नियंत्रण की मांग की।
नगरसेवक सचिन मोरे ने पर्वती टैंकर केंद्र का मुद्दा उठाया। उन्होंने अधिकारियों द्वारा दिए गए आंकड़ों पर असंतोष जताते हुए आरोप लगाया कि अधिकांश पानी निजी टैंकरों के जरिए बिल्डरों, होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भारी कीमत पर बेचा जा रहा है।
इससे आम नागरिक बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। कई बिल्डर भी अपने बोरवेल का पानी व्यावसायिक लाभ के लिए निजी टैंकर चालकों को बेच रहे हैं। सदन में यह बात भी सामने आई कि टैंकर केंद्रों के रजिस्टर और रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हैं, जिससे भारी वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं हो रही हैं।
अतिरिक्त आयुक्त पवनीत कौर ने बताया कि बांधों में जल संचय कम होने के कारण शहर में फिलहाल 25 प्रतिशत पानी की कटौती लागू की गई है। इस समय आठ टैंकर प्वाइंट चालू है और तीन नए प्वाइंट जल्द शुरू किए जाएंगे, व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। निजी टैंकरों की दरों को नियंत्रित करने और नई नीति लागू करने का निर्णय जल्द लिया जाएगा।
बैठक के दौरान जल संकट के साथ-साथ विकास कार्यों के लिए बेहद कम दरों पर आ रहे टेंडर्स का मुद्दा भी गूंजा। नगरसेवक गणेश बिडकर ने कहा कि कई ठेके 30 से 50 प्रतिशत तक कम दरों पर दिए जा रहे हैं, जिससे बुनियादी ढांचागत कार्यों की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
उन्होंने ऐसे टेंडर्स पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की। इस पर तकनीकी स्पष्टीकरण देते हुए पुणे शहर अभियंता अनिरुद्ध पावसकर ने कहा कि कम दरों पर मिले टेंडर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त आयुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई है, जो जल्द ही अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी।