पानी बिल बढ़ोतरी का मुद्दा (सौ. AI Generated )
Water Bill Hike In Pimpri Chinchwad: पिंपरी-चिंचवड़ शहर में 24 घंटे पानी की आपूर्ति का दावा करने वाली महानगरपालिका का सपना अब नागरिकों के लिए एक आर्थिक दुःस्वप्न साबित हो रहा है। हाल के दिनों में पिंपले गुरव क्षेत्र के निवासियों को पानी के बिलों ने एक बड़ा झटका दिया है।
शहर में पानी की आपूर्ति तो सामान्य रूप से जारी है, लेकिन पिंपरी-चिंचवड़ मनपा की बिलिंग प्रणाली और प्रशासन की लचर कार्यशैली ने एक बार फिर शहरवासियों को परेशान कर दिया है।
नागरिकों का आरोप है कि पानी के उपयोग में कोई बदलाव नहीं होने के बावजूद उनके बिलों में अचानक भारी वृद्धि देखी जा रही है, जिसके पीछे मीटर रीडिंग में की गई घोर लापरवाही और त्रुटियां जिम्मेदार हैं।
इस समस्या की जड़ में प्रशासन की निष्क्रयता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। चौंकाने वाली बात यह है कि जून 2025 में भी इसी तरह की समस्या सामने आई थी, जिसके बाद नागरिकों के भारी विरोध के बावजूद प्रशासन ने केवल खोखले आश्वासन दिए थे।
अब 2026 में भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे पिंपरी-चिंचवड़ महापालिका के कामकाज पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि सुधार के सभी वादे कागजों तक ही सीमित रह गए हैं और जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं आया है।
मीटर रीडिंग लेने में देरी बनी वजह विवाद का मुख्य बिंदु 20 सितंबर 2024 को महापालिका और कैनबेरी एनालिटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए करार का उल्लंघन है। इस करार के अनुसार, आवासीय ग्राहकों के लिए बिलिंग चक्र हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से पूरा होना चाहिए था। लेकिन पिंपले गुरव इलाके में बिल तय समय पर जारी करने के बजाय उनमें देरी की जा रही है।
मीटर रीडिंग लेने में की गई देरी के कारण जब बिल जारी होता है, तब तक तीन महीने की अवधि पार हो चुकी होती है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है, क्योंकि देरी की वजह से बिल का स्लैब बदल जाता है। इसके कारण जो ग्राहक सामान्यतः 600 से 1000 रुपये का बिल भरते थे, उन्हें अब 1500 से 2000 रुपये तक का भारी-भरकम भुगतान करना पड़ रहा है।
इस स्थिति का फायदा आप्रत्यक्ष रूप से टैंकर लॉबी को हो रहा है। एक तरफ बढ़ती गर्मी और पानी के कम दबाव के कारण नागरिक पहले ही कटौती का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ महापालिका की गलत बिलिंग प्रणाली उन्हें दोहरी मार झेलने पर मजबूर कर रही है। जिन इलाकों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है, वहां नागरिकों को निजी टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं।
यह प्रशासन की गलती हमारा पानी का उपयोग हमेशा की तरह ही है, फिर भी 3 महीने बाद अचानक बढ़ा बिल आ रहा है। यह प्रशासन की गलती है, तो सजा हमे क्यों मिले?
– अस्लम शेख, स्थानीय नागरिक
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कुछ क्षेत्रों में मीटर रीडिंग लेने में दिक्कते सामने आई है। संबंधित ठेकेदार कंपनी को समय पर रीडिंग लेने के निर्देश दिए गए है। साथ ही मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
– महेश वारुले, कार्यकारी, अभियंता, मनपा