

Maharashtra River Conservation News: पिंपरी पवना नदी के जल की गुणवत्ता में आई भारी गिरावट ने पिंपरी-चिंचवड़ के नागरिकों के स्वास्थ्य पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। रावेत, मामुर्डी और किवले जैसे प्रमुख क्षेत्रों की लगभग 35 बड़ी हाउसिंग सोसायटियों का गंदा पानी बिना किसी शुद्धिकरण के सीधे नालों के जरिए नदी में छोड़ा जा रहा है। इन सोसायटियों में लगे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बंद होने के कारण यह गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई है।
पवना नदी पूरे शहर की जल आपूर्ति का मुख्य स्रोत है, इसलिए उपचारित किए बिना गंदा पानी नदी में मिलना सीधे तौर पर लाखों शहरवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। कचरे और सीवेज से निबटान की चुनौती : रावेत के प्रभाग क्रमांक 16 में मनपा का 20 एमएलडी क्षमता का सरकारी एसटीपी प्लांट सक्रिय रूप से काम कर रहा है, लेकिन आसपास की निजी सोसायटियों से निकलने वाले अनियंत्रित कचरे और सीवेज ने इस व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।
चिंता का विषय यह भी है कि सामान्यतः केवल बारिश में बहने वाले नाले अब घरेलू सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के कारण साल भर बह रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध और बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि नदी प्रदूषण रोकने के लिए तत्काल जांच अभियान चलाया जाए, बंद पड़े प्लांटों को शुरू कराया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि नदी की जैव विविधता और जनस्वास्थ्य की रक्षा हो सके।
प्रशासनिक स्तर पर अब इस मामले में सख्ती बरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने नालों की सफाई के लिए जेसीबी तैनात की है, वहीं पर्यावरण विभाग ने बताया है कि पूरे पिंपरी शहर में ऐसी कुल 146 सोसायटियां हैं, जिनके एसटीपी प्लांट बंद पड़े हैं। शहर अभियंता संजय कुलकर्णी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि संबंधित सोसायटियों को नोटिस जारी कर दिए गए है।