समन्वय पोर्टल से साइबर ठगी का भंडाफोड़: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में 'म्यूल अकाउंट' धारकों पर दर्ज हुई FIR

Pimpri Chinchwad Cyber Crime: समन्वय पोर्टल के जरिए पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में साइबर ठगी में इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट' का खुलासा। पुलिस ने संदिग्ध खाताधारकों पर मामले दर्ज किए।
Pune and Pimpri-Chinchwad police registered FIRs against 'mule account' holders involved in cyber fraud using data from MHA's Samvanway portal.
साइबर ठगी का भंडाफोड़ (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Mule Bank Account Cyber Fraud FIR Pune Police Action: केंद्र सरकार के अत्याधुनिक 'समन्वय' पोर्टल के माध्यम से देशभर में साइबर अपराधों की जांच प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आई है। इसी कड़ी में, साइबर ठगी से जुड़े मामलों में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के नागरिकों के बैंक खातों का अवैध रूप से इस्तेमाल होने की गंभीर जानकारी सामने आई है।

स्थानीय पुलिस ने पोर्टल से प्राप्त महत्वपूर्ण सूचनाओं का गहन विश्लेषण करने के बाद संबंधित बैंक खातों की जांच तेज कर दी है। इसके तहत, साइबर धोखाधड़ी में शामिल संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ 'म्यूल अकाउंट' से जुड़े आपराधिक मामले दर्ज करने का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अब तक इस कार्रवाई के अंतर्गत पुणे में 10 और पिंपरी-चिंचवड़ में 8 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

क्या है 'समन्वय' पोर्टल ?

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर द्वारा 'समन्वय' पोर्टल का संचालन किया जाता है। यह एक केंद्रीयकृत डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से देशभर में होने वाले साइबर अपराधों का डेटा एक स्थान पर एकत्रित किया जाता है।

देश भर की विभिन्न पुलिस एजेंसियां इस पोर्टल का उपयोग करती हैं। इस प्लेटफॉर्म पर साइबर अपराधों में इस्तेमाल किए गए संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, अपराधियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़ा विस्तृत डेटाबेस उपलब्ध रहता है, जिससे जांच एजेंसियों को अपराधियों तक पहुंचने और त्वरित कानूनी कार्रवाई करने में बड़ी मदद मिलती है।

कैसे बनाते हैं 'म्यूल अकाउंट'?

साइबर पुलिस अपराधों से जुड़े मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर गहराई से छानबीन करती है। जांच में खुलासा हुआ है कि साइबर अपराधी आम नागरिको के बैंक खातों का उपयोग ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।

ठगी से प्राप्त अवैध रकम को पहले कई अलग-अलग लेयर वाले खातों में जमा कराया जाता है और बाद में आसानी से निकाल लिया जाता है। अपना बैंक खाता या उसका एक्सेस उपलब्ध कराने वाले व्यक्त्ति को इसके बदले कमीशन या पैसे दिए जाते हैं।

अनजान लोगों को बैंक खाते की न दें जानकारी

कई बार लोग आर्थिक तंगी, मजबूरी या थोड़े से लालच में आकर अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करने की अनुमति दूसरों को दे देते हैं। ऐसे अवैध रूप से इस्तेमाल होने वाले खातों को ही तकनीकी भाषा में म्यूल अकाउंट' कहा जाता है। कई बार खाताधारकों को इस बात की पूरी जानकारी भी नहीं होती कि उनके खाते का उपयोग किस बड़े वित्तीय अपराध के लिए हो रहा है। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे अनजान लोगों के साथ अपने बैंक खाते या दस्तावेज साझा न करें।।

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