Pawana River Pollution: पवना नदी शुद्धिकरण का फंड फिर अटका, NGT ने PCMC से मांगा वैकल्पिक रोडमैप

Pavana River Pollution: पवना नदी प्रदूषण नियंत्रण हेतु प्रस्तावित सीवेज प्लांट के लिए फंड की कमी पर एनजीटी ने पीसीएमसी से 4 सप्ताह में वैकल्पिक वित्तीय योजना की शपथ पत्र मांगी है।
Pawana River Pollution: Funds not received for sewage treatment project
पवना नदी प्रदूषण, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Pavana River Cleanup: पुणे के पवना नदी के बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट परियोजना के सामने अब फंड की बड़ी अड़चन खड़ी हो गई है। महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को बताया है कि मौजूदा 15वें वित्त आयोग के तहत नए प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध नहीं है।

इसके बाद एनजीटी ने पिंपरी-चिंचवड महापालिका (पीसीएमसी) से पूछा है कि वह परियोजना के लिए वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था कैसे करेगी ? राज्य सरकार के शपथ पत्र के अनुसार, राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय (एनआरसीडी) के पास भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए मौजूदा योजना के तहत राशि उपलब्ध नहीं है।

हालांकि, पीसीएमसी ने परियोजना में राज्य के 40 प्रतिशत हिस्से के बराबर राशि उपलब्ध कराने की तैयारी जताई है।

शेष राशि की व्यवस्था किस तरह होगी, इस पर अब महापालिका को विकल्प तलाशने होंगे। परियोजना के लिए केंद्र और राज्य के बीच 60:40 वित्तीय हिस्सेदारी का प्रस्ताव है।

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए राशि उपलब्ध नहीं

पीसीएमसी ने एनजीटी से अतिरिक्त समय मांगते हुए यह स्पष्ट करने की अनुमति मांगी कि वह अपने स्तर पर आवश्यक धन जुटा सकती है या परियोजना लागू करने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जा सकती है।

शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश

न्यायाधिकरण ने मनपा को 4 सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार ने बताया कि 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए 16वें वित्त आयोग के तहत राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना को जारी रखने का प्रस्ताव प्रक्रिया में है। इसलिए फिलहाल नए पवना प्रोजेक्ट के लिए मौजूदा योजना से धन उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

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प्रदूषण के मामले में 4 उद्योग भी घेरे में

पुणे शहर के पवना नदी प्रदूषण से जुड़े दो मामलों की सुनवाई एनजीटी में चल रही है। इनमें एक मामला फरवरी 2024 की उस रिपोर्ट के बाद सामने आया था, जिसमें पवना नदी को 'प्राथमिकता-1' प्रदूषित नदी क्षेत्र में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई थी।

इसी सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीडी) ने नदी को प्रदूषित करने वाले चार उद्योगों की जांच रिपोर्ट और उनके खिलाफ निर्धारित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का विवरण भी प्रस्तुत किया।

एनजीटी ने चारों उद्योगों को मामले में पक्षकार बनाने और जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

10 सितंबर को न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. सुजीत कुमार बाजपेयी की पीठ ने ये निर्देश दिए। अब मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

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