पुणे जमीन घोटाला: पार्थ पवार की कंपनी को भरना ही होगा 23 करोड़ का भारी जुर्माना; जानें क्या है पूरा मामला

Pune Land Scam: पुणे के मुंडवा में सरकारी जमीन सौदे में राज्यसभा सांसद पार्थ पवार की कंपनी Amedia पर 21 करोड़ की स्टैंप ड्यूटी और 2 करोड़ का जुर्माना ठोंका गया है। कंपनी छूट के सबूत नहीं दे पाई।
Parth Pawar Company Amedia Fined
पार्थ पवार (फाइल फोटो, सोशल मीडिया)
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Parth Pawar Company Amedia Fined: पुणे के मुंडवा में सरकारी जमीन के घोटाले के मामले में राज्यसभा सांसद पार्थ पवार की कंपनी Amedia को 21 करोड़ की बकाया स्टैंप ड्यूटी और 2 करोड़ का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है। पंजीकरण महानिरीक्षक और स्टाम्प नियंत्रक रविंद्र बिनवाडे ने यह फैसला सुनाया। इस फैसले के खिलाफ राजस्व मंत्री के पास अपील करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है।

कंपनी ने इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट द्वारा जारी एक लेटर ऑफ इंटेंट के आधार पर स्टैंप ड्यूटी से छूट मांगी थी। हालांकि, वह इस दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर पाई। नतीजतन, बिनवाडे ने 21 करोड़ की बकाया स्टैंप ड्यूटी में छूट की कंपनी की अर्जी को खारिज कर दिया। फैसले में कहा गया है कि इस आदेश के मुताबिक, Amedia कंपनी को कुल 23 करोड़ की रकम चुकानी होगी।

क्या है मामला?

फैसले में कहा गया है कि इस आदेश के मुताबिक, Amedia कंपनी को कुल 23 करोड़ की रकम चुकानी होगी। यह मामला तब सामने आया जब Amedia Enterprises के एक शेयरहोल्डर दिग्विजय सिंह पाटिल ने मुंडवा में 'बॉटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया' की 40 एकड़ जमीन पावर ऑफ अटॉर्न' धारक शीतल तेजवानी से 300 करोड़ में खरीदी।

छूट का दावा पड़ा भारी

इसी के अनुसार, सुनवाई की प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि, कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया, क्योंकि बिनवाडे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के सिलसिले में सरकारी ड्यूटी पर थे। इस बीच, Amedia को इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट से संबंधित दस्तावेज जमा करने का मौका दिया गया। हालांकि, कंपनी इस मामले से जुड़े ज़रूरी दस्तावेज जमा करने में नाकाम रही। इसलिए इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन बिनवाडे ने सुनवाई की कार्यवाही पूरी करते हुए अपना फैसला सुनाया। उन्होंने आदेश दिया कि कंपनी को कुल 23 करोड़ रुपए चुकाने होंगे। इसमें 21 करोड़ की बकाया स्टाम्प ड्यूटी और उस पर लगाया गया 2 करोड़ का जुर्माना शामिल है।

पंजीकरण महानिरीक्षक और स्टाम्प नियंत्रक रविंद्र बिनवाडे ने कहा कि उद्योग निदेशालय से लेटर ऑफ इंटेंट (आशय पत्र) मिलने के बाद कंपनी ने दस्तावेजों के पंजीकरण के दौरान स्टाम्प ड्यूटी में छूट की मांग की थी। हालांकि सुनवाई के दौरान कंपनी आवश्यक सहायक दस्तावेज जमा करने में विफल रही। इसके कारण उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया और अब उन्हें कुल 23 करोड़ का भुगतान करना होगा।

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