पुणे के स्कूल में 'तिलक' पर संग्राम: मुख्याध्यापक के फैसले के खिलाफ हिंदुत्ववादी संगठनों का भारी हंगामा

Pune School Tilak Controversy: पुणे के न्हावी गांव में छात्रों को तिलक लगाकर स्कूल आने से रोकने पर विवाद। शिव प्रतिष्ठान के कार्यकर्ताओं का हंगामा, शिक्षा विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण।
Pune School Tilak Controversy
Pune School Tilak Controversy (फोटो क्रेडिट-X)
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New English School Nhavi Dispute: पुणे के न्हावी गांव स्थित पुणे जिला शिक्षा मंडल के न्यू इंग्लिश स्कूल में छात्रों को माथे पर तिलक लगाकर आने से रोकने का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद में बदल गया है। स्कूल के मुख्याध्यापक एस. एन. कांबले पर आरोप है कि उन्होंने न केवल छात्रों को तिलक लगाने से मना किया, बल्कि कुछ छात्रों को जबरन तिलक हटाने के लिए भी कहा। इस घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में तनाव फैल गया और हिंदुत्ववादी संगठनों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

धार्मिक स्वतंत्रता और स्कूल अनुशासन के बीच छिड़ी इस बहस ने अभिभावकों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि तिलक लगाना एक सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकार है, जिसे स्कूल परिसर में प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। वहीं, स्कूल प्रशासन इसे अनुशासन का हिस्सा बता रहा है, जिससे मामला और अधिक पेचीदा हो गया है।

शिव प्रतिष्ठान और हिंदुत्ववादी संगठनों का भारी हंगामा

तिलक विवाद की खबर मिलते ही 'शिव प्रतिष्ठान' के धारकरी और अन्य हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में न्यू इंग्लिश स्कूल पहुँच गए। कार्यकर्ताओं ने मुख्याध्यापक एस. एन. कांबले को घेर लिया और उनसे इस भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर जवाब मांगा। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि तिलक लगाकर आने वाले छात्रों के साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जो किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए अशोभनीय है। स्कूल परिसर में घंटों चले हंगामे के दौरान कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में हिंदू प्रतीकों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ, तो वे और अधिक तीव्र आंदोलन करेंगे।

अनुशासन के नाम पर ड्रेस कोड का तर्क

विवाद बढ़ता देख मुख्याध्यापक एस. एन. कांबले ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था, बल्कि वे केवल स्कूल में ड्रेस कोड और अनुशासन बनाए रखने का प्रयास कर रहे थे। मुख्याध्यापक ने कहा कि उन्होंने किसी विशेष धार्मिक चिह्न पर स्थायी प्रतिबंध नहीं लगाया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी इस तर्क से संतुष्ट नहीं दिखे और इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करार दिया। आखिरकार, बढ़ते दबाव के बीच स्कूल प्रशासन को झुकना पड़ा और उन्होंने मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने का आश्वासन दिया।

शिक्षा विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण

महाराष्ट्र के स्कूलों में तिलक, बिंदी या राखी पहनने पर प्रतिबंध की यह पहली घटना नहीं है; इससे पहले भी राज्य के अन्य शहरों से ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने संज्ञान लिया है और स्कूल प्रशासन से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच संवाद के माध्यम से इस मुद्दे का समाधान निकाला जाए ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। नगर निगम और शिक्षा विभाग अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या स्कूल के नियमों में धार्मिक प्रतीकों को लेकर कोई स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गए थे।

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