नसरापुर कांड: 15 दिनों में 1200 पन्नों की चार्जशीट, 55 गवाहों के बयान और 137 पन्नों का फैसला, जानें पूरी कहानी

Nasrapur Case: महाराष्ट्र के पुणे में साढ़े तीन साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के मामले में कोर्ट ने केवल 59 दिनों में न्याय करते हुए दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। जानिए पूरी कहानी।
Nasrapur Case Historic Judgment
नसरापुर में मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या का दोषी भीमराव कांबले (डिजाइन फोटो)
Published on
Updated on

Nasrapur Case Historic Judgment: महाराष्ट्र को झकझोर देने वाले पुणे जिले के नसरापुर की साढ़े तीन वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में विशेष अदालत ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी भीमराव प्रभाकर कांबले (65) को फांसी की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश एस.आर. सालुंखे ने 137 पन्नों के फैसले में इस अपराध को 'दुर्लभतम में दुर्लभ' श्रेणी का बताते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराध समाज की अंतरात्मा को झकझोर देते हैं और इनके लिए कठोरतम दंड ही न्याय का वास्तविक स्वरूप है। आइए जानते हैं इस खौफनाक वारदात से दोषी को फांसी सजा सुनाने तक की पूरी कहानी।

क्या है नसरापुर मामला?

दसअसल पुणे जिले की भोर तहसील के नसरापुर में साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची अपनी नानी के घर छुट्टियां बिताने आई थी। 1 मई 2026 को 65 साल के भीमराव कांबले ने मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर एक शेड में ले गया था। वहां उसने उसके साथ हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए दुष्कर्म किया। इसके बाद पोल खुलने के डर से उसने बच्ची को मुंह दबाकर और छाती पर पत्थर से वार का उसकी हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र में आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से हुए कई खुलासे

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, यह बात सामने आई कि आरोपी ने बच्ची के मुंह में कपड़ा ठूंसने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया। ससून अस्पताल में बच्ची के शव की फोरेंसिक जांच की गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि अपराधी ने बच्ची की मौत सुनिश्चित करने के लिए उसकी छाती पर जोरदार वार किया था। इसके बाद, आरोपी ने यह और पक्का करने के लिए कि बच्ची सचमुच मर चुकी है उसे एक पत्थर से कुचल दिया।

नसरापुर कांड में पुणे पुलिस ने दिखाई तेजी

मामला सामने आने के बाद पुणे पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सीसीटीवी फुटेज व अन्य सबूतों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया। इस मामले की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अभूतपूर्व गति रही। घटना से लेकर सजा सुनाए जाने तक की पूरी न्यायिक प्रक्रिया महज 59 दिनों में पूरी हुई। पुलिस ने घटना के केवल 15 दिनों के भीतर 1200 पन्नों का आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया था।

विशेष अदालत ने 21 मई से मामले की रोजाना सुनवाई शुरू की

इसके बाद पुणे की विशेष अदालत ने 21 मई से मामले की रोजाना सुनवाई शुरू की। खास बात यह रही कि मामले में एक भी दिन सुनवाई स्थगित नहीं हुई। इस मामले में कुल 55 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें पीड़िता के परिजन, प्रत्यक्षदर्शी, पंच, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, डीएनए विश्लेषक और जांच अधिकारी शामिल थे।

अदालत ने सुनवाई पूरी करने के लिए अवकाश के दिनों में भी काम किया। न्यायाधीश एस.आर. सालुंखे ने इस मामले को प्राथमिकता देते हुए लगातार सुनवाई की और समयबद्ध न्याय का उदाहरण पेश किया।

वैज्ञानिक साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन का पक्ष

प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने के बावजूद पुलिस ने परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों की मजबूत श्रृंखला तैयार की। जांच के दौरान घटनास्थल से जुटाए गए नमूनों, सीसीटीवी फुटेज, डीएनए रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों ने आरोपी के खिलाफ मजबूत आधार तैयार किया।

फॉरेंसिक जांच में पीड़िता के शरीर और घटनास्थल से मिले नमूनों में आरोपी की मौजूदगी की पुष्टि हुई। आरोपी के कपड़ों पर बच्ची का रक्त भी पाया गया। गांव के 6 अलग-अलग सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण कर आरोपी की गतिविधियों की पुष्टि की गई।

नसरापुर कांड में कोर्ट के सामने पीड़ित पक्ष ने रखी ये दलीलें

नसरापुर केस में अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी ने पूरी योजना और रेकी के बाद अपराध को अंजाम दिया। उसने न केवल एक मासूम बच्ची की जिंदगी छीनी, बल्कि समाज की संवेदनाओं को भी गहरी चोट पहुंचाई। आरोपी को अपने कृत्य पर कोई पश्चाताप नहीं है और उसे मृत्युदंड से कम सजा देना न्याय के साथ अन्याय होगा। अदालत ने अभियोजन की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत क्रूर, अमानवीय और समाज को झकझोरने वाली है। इसलिए इसे दुर्लभतम में दुर्लभ मामलों की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

परिवार ने कहा- हमारी बेटी को मिला न्याय

फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पीड़ित बच्ची के परिजनों ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी बेटी को न्याय मिला। मामले की जांच अधिकारी पुलिस निरीक्षक विजयमाला पवार ने कहा कि एक मां और पुलिस अधिकारी के रूप में उनका एकमात्र उद्देश्य पीड़िता को न्याय दिलाना था।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com