मुला नदी में सैकड़ों मछलियां मरीं, एक सप्ताह बाद भी कारण स्पष्ट नहीं, MPCB की कार्रवाई पर सवाल

Pune Mula River Dead Fish: बानेर में मुला नदी और आलंदी में इंद्रायणी नदी में सैकड़ों मछलियों की मौत की घटना को एक सप्ताह बीतने के बावजूद MPCB और नगर निगम कारण स्पष्ट नहीं कर सके हैं।
बानेर में मुला नदी के तट पर मरी हुई मछलियां और दूषित जल
बानेर में मुला नदी के तट पर मरी हुई मछलियां और दूषित जल(सोर्स- सोशल मीडिया)
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PMC PCMC River Pollution Negligence: बानेर में मुला नदी और आलंदी में इंद्रायणी नदी में सैकड़ों मछलियों की मौत की घटना को एक सप्ताह बीतने के बावजूद MPCB और नगर निगम कारण स्पष्ट नहीं कर सके हैं। पर्यावरणविदों ने एजेंसियों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।

बानेर के पास मुला नदी और आलंदी क्षेत्र में इंद्रायणी नदी में मछलियों की मौत की घटना को एक सप्ताह बीतने के बावजूद इसके कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के साथ महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मछलियों की मौत के लिए जिम्मेदार कारणों और संभावित प्रदूषण स्रोत की पहचान के लिए अपेक्षित ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

ई-मेल के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का दावा

पुणे रिवर रिवाइवल की प्राजक्ता महाजन के अनुसार, एमपीसीबी, पीएमसी और पीसीएमसी के अधिकारियों को इस संबंध में कई ई-मेल भेजे गए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि हर वर्ष नदी में इस तरह की घटनाएं सामने आने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।

पर्यावरणविद् श्रीकांत इंगलहालीकर के अनुसार, नदी के पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम होने पर मछलियों की मौत हो सकती है। उनके मुताबिक कम बारिश, बांधों से पानी का कम प्रवाह, नदी में गाद जमा होना और अनुपचारित सीवेज के नदी में मिलने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

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पानी के नमूने जांच के लिए भेजे

एमपीसीबी के उपक्षेत्रीय अधिकारी माणिक जाधव ने बताया कि नदी के पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट सोमवार तक मिलने की उम्मीद है। प्रारंभिक तौर पर ताजे पानी की कमी और ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मनपा को शिकायत नहीं मिलने का दावा

वहीं, मनपा के पर्यावरण विभाग प्रमुख माधव जगताप ने कहा कि उन्हें इस संबंध में शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों को मामले की जांच के निर्देश देने की बात कही। उन्होंने बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का काम जारी है।

नदी की सफाई के लिए सौर ऊर्जा आधारित एरेशन फाउंटेन और कचरा रोकने वाले अवरोधक लगाने जैसी स्थानीय व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है। अब पानी की जांच रिपोर्ट से मछलियों की मौत के संभावित कारणों और पानी की गुणवत्ता की स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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