मोशी डिपो हादसा: 482 करोड़ खर्च के बाद भी लापरवाही? सांसद बारणे ने उठाए सवाल, भावेश का आखिरी मैसेज भावुक

Moshi Depot Accident: मोशी कचरा डिपो हादसे में मृत भावेश वाणी के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़। सांसद श्रीरंग बारणे ने 482 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए।
MP Shrirang Barne demands an FIR over the Moshi depot collapse, questioning the Rs 482 crore waste management spend। Victim Bhavesh Vani's final text emerges
मोशी डिपो हादसे (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Pimpri Chinchwad Moshi Garbage Depot: पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका के मोशी कचरा डिपो में हुए भीषण हादसे ने पर्यावरण विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डिपो के प्रबंधन, कचरे के पहाड़ कम करने और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए अब तक 482 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद बुधवार को प्रशासनिक भवन पर कचरे का विशाल ढेर ढह गया, जिसमें एक कर्मचारी की मौत हो गई।

बता दें कि डिपो में पहले भी आग लगने और कचरे के धंसने की घटनाएं सामने आती रही हैं। यहां करोड़ों रुपये की बायोमाइनिंग परियोजना और 'वेस्ट टू एनर्जी' प्लांट संचालित होने के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं। हादसे के बाद मावल के सांसद श्रीरंग बारणे ने घटनास्थल का दौरा कर अधिकारियों से जानकारी ली।

उन्होंने कहा कि सौ फीट से अधिक ऊंचे कचरे के ढेर के बिल्कुल पास प्रशासनिक भवन बनाना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की।

पीएम मोदी ने किया था उ‌द्घाटन

बारणे ने कहा कि करीब 1,350 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना का उ‌द्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, ऐसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने की भी मांग की।

आखिरी संदेश बन गया अंतिम यादगार

मोशी कचरा डिपो में हुए हादसे ने जलगांव के एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली। निगड़ी के रूपीनगर निवासी भावेश मोहन वाणी (34) की कचरे के मलबे में दबकर मौत हो गई। मूल रूप से जलगांव जिले के शिरसोली गांव के रहने वाले भावेश अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता ने वर्षों तक पापड़ बेचकर बेटे को पढ़ाया-लिखाया था। डेढ़ वर्ष पहले ही विवाह हुआ था।

हादसे से कुछ मिनट पहले दोपहर 1:31 बजे उन्होंने अपनी पत्नी को मोबाइल पर संदेश भेजा था कि वे खाना खाने बैठे हैं। यही संदेश उनके जीवन का अंतिम संवाद साबित हुआ। इसके कुछ देर बाद कचरे का विशाल ढेर प्रशासनिक भवन पर गिर गया और भावेश उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

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