

Pune Monsoon Delay 2026 water supply: महाराष्ट्र में इस वर्ष मानसून की बेरुखी ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जून का आधा महीना बीत जाने के बावजूद शहर और आसपास के इलाकों में बारिश की एक बूंद तक नहीं गिरी है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, शिवाजी नगर वेधशाला में जून के शुरुआती 15 दिनों के दौरान शून्य वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
वर्ष 1958 के बाद यह पहली बार है जब जून का शुरुआती पखवाड़ा पूरी तरह सूखा रहा है। इस असाधारण स्थिति ने शहर में भीषण गर्मी, उमस, गहराते जल संकट और कृषि क्षेत्र की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस वर्ष मानसून ने केरल में समय पर दस्तक दी थी, लेकिन उसके बाद इसकी प्रगति धीमी पड़ गई। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मौसमी सिस्टम विकसित न होने के कारण मानसूनी हवाएं आगे नहीं बढ़ सकीं। पुणे में आमतौर पर जून के पहले सप्ताह में प्री-मानसून बारिश शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार आसमान में बादल छाने के बावजूद बरस नहीं रहे हैं। जानकारों का मानना है कि वायुमंडलीय दबाव में असंतुलन, नमी की कमी और अल-नीनो के प्रभाव के कारण मानसून कमजोर पड़ा है। दिनभर की तेज धूप और उमस से नागरिक बेहाल हैं, जिससे बिजली और पानी की मांग में भारी उछाल आया है।
आईएमडी पुणे के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले वर्ष 1915 और 1932 में जून के शुरुआती 17 दिनों तक बारिश नहीं हुई थी। हालांकि, उन वर्षों में उत्तरार्ध में मानसून सक्रिय हुआ और जून के अंत तक अच्छी बारिश दर्ज की गई। वर्ष 1915 के जून में कुल 362 मिमी वर्षा हुई थी, जबकि 1932 में 79 मिमी और 1958 में 65 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
बारिश न होने का सबसे गंभीर असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। पुणे और पश्चिमी महाराष्ट्र के किसान खरीफ फसलों (सोयाबीन, मक्का, कपास और धान) की बुआई के लिए चातक की तरह बादलों का इंतजार कर रहे है। खेत तैयार होने के बावजूद बुआई ठप है।
दूसरी ओर, पुणे शहर को पानी देने वाले चार प्रमुख बांधों खडकवासला, पानशेत, टेमघर और वरसगांव का जलस्तर तेजी से गिर रहा है। वर्तमान में शहर में एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो पानी की कटौती और बढ़ाई जा सकती है। ग्रामीण इलाकों में अभी से टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) पुणे के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक अनुपम काश्यपि ने बताया कि वर्तमान में महाराष्ट्र और उससे सटे क्षेत्रों में कोई मजबूत वेदर सिस्टम मौजूद नहीं है, जिससे मानसून की गति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि 18 जून के बाद परिस्थितियां अनुकूल होने पर मानसूनी धारा आगे बढ़ सकती है और राज्य के अधिक हिस्सों को कवर कर सकती है।
मानसून में हो रही देरी के बीच पुणे महानगरपालिका ने संभावित जल संकट से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। मनपा के जल आपूर्ति विभाग प्रमुख नंदकुमार जगताप ने बताया कि मौजूदा जल भंडार के आधार पर शहर में अगस्त के अंत तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। हालांकि यदि इसके बाद भी पर्याप्त वर्षा नहीं होती है, तो आपातकालीन जल प्रबंधन योजना लागू की जाएगी।
उन्होंने बताया कि वैकल्पिक जल स्रोतों को मजबूत करने के लिए पुराने कुओं के पुनर्जीवन और नए बोरवेल खोदने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं। इसके अलावा जल भंडारण और वितरण व्यवस्था की भी लगातार समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की जल कमी की स्थिति उत्पन्न न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जून के दूसरे पखवाड़े में मानसून सक्रिय हो जाता है, तो कृषि, पेयजल आपूर्ति और जलाशयों की स्थिति में सुधार होगा। फिलहाल प्रशासन और नागरिकों दोनों को जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि मानसून की अनिश्चितता के बीच जल संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।