भारी बारिश के बीच मावल में तबाही: नालों पर अतिक्रमण और अवैध विकास कार्यों से बढ़ा बाढ़ का संकट

Maval Flood News: मावल तालुका में अंधाधुंध निर्माण और प्राकृतिक नालों को बंद करने से बाढ़ का संकट। बिल्डरों की मनमानी के कारण खेतों और सोसायटियों में पानी घुसने से भारी नुकसान।
Rampant construction and blocking of natural streams by builders trigger severe flooding in Maval taluka, damaging crops and residential complexes amid rain.
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Pune Builders Encroachment Flood: मावल तालुका के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश ने बाढ़ और भूस्खलन जैसी गंभीर आपदाओं को जन्म दिया है। लेकिन इस तबाही के लिए केवल प्राकृतिक बारिश ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि बिल्डर्स और डेवलपर्स की बेलगाम मनमानी इसका मुख्य कारण बनकर उभरी है।

अपने निजी आर्थिक लाभ के लिए प्राकृतिक जलधाराओं और पारंपरिक नालों का रुख मोड़ने का खामियाजा आज मावल के आम नागरिकों और किसानों को भारी नुकसान के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

मावल में चारों तरफ फैल रहा हाउसिंग प्रोजेक्ट और प्लॉटिंग का कारोबार

पिछले कुछ वर्षों में मुंबई-पुणे महामार्ग से सटे वडगांव मावल, तलेगांव दाभाडे, सोमाटणे फाटा, कान्हे, जांभूल, साते और कामशेत जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर हाउसिंग प्रोजेक्ट और प्लॉटिंग का कारोबार फैला है। अंदरूनी मावल क्षेत्र में भी धनाढ्य लोगों ने कौड़ियों के भाव पहाड़ी जमीनें खरीदकर, पहाड़ों को काटकर और मनमाने ढंग से भूमि विकास कर भारी मुनाफा कमाया है।

इस अंधाधुंध निर्माण कार्य के दौरान पहाड़ों पर ब्लास्टिंग की गई और सदियों पुराने प्राकृतिक नालों को बंद कर दिया गया। जब बिल्डर्स इन परियोजनाओं को मंजूरी लेते हैं, तो वे प्राकृतिक नालों की जगह बेहद छोटे भूमिगत पाइप डाल देते हैं।

मानसून के दौरान इन संकरे पाइपों से भारी मात्रा में पानी की निकासी नहीं हो पाती, जिससे पानी का स्वाभाविक प्रवाह रुक जाता है और वह आसपास के खेतों तथा रिहायशी सोसायटियों में घुसकर तबाही मचाता है।

किसानों की कड़ी मेहनत से तैयार फसल हो गई बर्बाद

साते ग्राम पंचायत क्षेत्र इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहां पारंपरिक खापरे नाले पर मिट्टी डालकर अतिक्रमण किया गया और सफाई के नाम पर उसका रास्ता ही बदल दिया गया। इसके चलते बाढ़ का पानी फसलों को बहा ले गया, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत मिट्टी में मिल गई। यही हाल वडगांव शहर की मोरया कॉलोनी, दिग्विजय कॉलोनी और दत्त मंदिर जैसे इलाकों का है, जहां कृत्रिम जल निकासी की नाकामी के कारण सड़कें और घर जलमग्न हो चुके है।

बिल्डर्स सरकारी स्वीकृत मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाकर मालामाल हो रहे है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। अब यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या स्थानीय नगर पंचायत और प्रशासन इन रसूखदार बिल्डर्स पर कभी शिकंजा कसेगा या किसान यूं ही अपनी बर्बादी का मंजर देखने को मजबूर रहेंगे।

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