
सुनेत्रा पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sunetra Pawar Deputy CM Proposal: महाराष्ट्र की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद खाली हुए नेतृत्व के पद को भरने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर मंथन शुरू हो गया है। हाल ही में वरिष्ठ नेताओं की सुनेत्रा पवार से हुई मुलाकात ने नए कयासों को जन्म दे दिया है।
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल मच गई जब अजित पवार के अंतिम संस्कार के ठीक बाद एनसीपी के दिग्गज नेता प्रफुल पटेल, छगन भुजबल और धनंजय मुंडे सीधे सुनेत्रा पवार के निवास स्थान पहुंचे। इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसके पीछे राज्य के भविष्य की सत्ता का समीकरण छिपा हुआ है।
सूत्रों की मानें तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सुनेत्रा पवार के सामने महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री बनने का औपचारिक प्रस्ताव रखने की तैयारी कर ली है। अजित पवार के निधन से न केवल सरकार में एक बड़ा शून्य पैदा हुआ है, बल्कि बारामती विधानसभा सीट भी रिक्त हो गई है। पार्टी का एक बड़ा धड़ा चाहता है कि सुनेत्रा पवार बारामती से उपचुनाव लड़ें और अजित दादा की विरासत को आगे बढ़ाएं।
इस मुलाकात के दौरान केवल पद ही नहीं, बल्कि पार्टी के भविष्य पर भी चर्चा हुई। हालांकि, शरद पवार गुट के साथ विलय की खबरों पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। नेताओं का मानना है कि इस कठिन समय में पार्टी को एक मजबूत चेहरे की जरूरत है जो कैडर्स को एकजुट रख सके। सुनेत्रा पवार, जो पहले से ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय रही हैं, इस भूमिका के लिए सबसे फिट मानी जा रही हैं।
यदि सुनेत्रा पवार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती हैं, तो उन्हें न केवल विपक्षी दलों की चुनौतियों का सामना करना होगा, बल्कि पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों के बीच सामंजस्य भी बिठाना होगा। प्रफुल पटेल और भुजबल जैसे अनुभवी नेताओं का समर्थन उनके लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है। बारामती की जनता का भावनात्मक लगाव भी सुनेत्रा के पक्ष में एक बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है।
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अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर भी चर्चा तेज हो गई। इसके लिए प्रफुल पटेल का नाम सबसे आगे चल रहा है। पटेल एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं। प्रफुल पटेल एनसीपी के सबसे अनुभवी रणनीतिकार और इसके संस्थापक लोगों में से एक हैं। पूर्व केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री और दिल्ली में शरद पवार के लंबे समय तक बातचीत करने वाले पटेल, 2023 के बंटवारे के दौरान अजित पवार के कैंप में चले गए, जिससे गुट को संगठनात्मक ताकत मिली।
उनकी ताकत गठबंधन मैनेजमेंट, राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच और पार्टी सिस्टम की गहरी जानकारी है। उन्हें एक संकटमोचक के तौर पर जाना जाता है जो मुश्किल समय में पार्टी को एक साथ रख सकते हैं। हालांकि, पटेल कभी भी मास लीडर नहीं रहे हैं और महाराष्ट्र में उनका कोई मजबूत मतदाता आधार नहीं है।






