महाराष्ट्र निकाय चुनाव: सुबह से मतदान करने लगी लंबी कतारें, जानें कहां कितने प्रतिशत हुई वोटिंग

Maharashtra Nikay Chunav: महाराष्ट्र की 264 नगर परिषदों और नगर पंचायत चुनाव में सुबह के पहले घंटों में 7.94% मतदान हुआ। दोपहर तक वोटिंग 17.11% पहुंची। कई जिलों में मशीनें अटकी और हल्की झड़पें भी हुईं।
Maharashtra local body election voting
मतदान करते लोग (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Local Body Election Voting Percentage: महाराष्ट्र में 264 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव के लिए मंगलवार को हो रहे मतदान के पहले दो घंटों में अनुमानित 7.94 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान सुबह साढ़े सात बजे शुरू हुआ जो शाम साढ़े पांच बजे समाप्त होगा।

महाराष्ट्र नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव में राज्य में अब तक हुए वोटिंग के आंकड़े अब सामने आ गए हैं। सुबह 11:30 तक 17,76,334 लोगों ने वोट दिए। अब तक 17.11 प्रतिशत वोटिंग हुई। जिसमें 9,68,534 पुरुष और 8,07,747 महिलाएं व 53 अन्य ने मताधिकार का प्रयोग किया।

अधिकारियों के अनुसार, सुबह 10 बजे तक महाराष्ट्र में 7.94% वोटिंग हुई थी। कोल्हापुर में सुबह 11 बजे तक 40% वोटिंग हुई। इस बीच, हाटकलिंगले के वार्ड 4 में मशीनें दो बार अटक गईं। कागल में वोटिंग के दौरान पोलिंग स्टेशन पर हाथापाई हुई।

रत्नागिरी में 30.39 प्रतिशत वोटिंग

रत्नागिरी जिले में 4 घंटे में 30.39 प्रतिशत वोटिंग हुई। यहां रत्नागिरी नगर परिषद में 21.93, चिपलून नगर परिषद में 24.02, खेड़ नगर परिषद में 28.1, राजापुर नगर परिषद में 30.28, लांजा नगर पंचायत में 32.6, देवरुख नगर पंचायत में 32.86, गुहागर नगर पंचायत में 46.47 प्रतिशत वोटिंग हुई।

पुणे में 20.22 फीसदी वोटिंग

पुणे में 12 नगर परिषदों और 3 नगर पंचायतों में 20.22 प्रतिशत वोटिंग हुई है। जव्हार में 18.93 प्रतिशत, उरण-ईश्वरपुर में 24.50 प्रतिशत, विटा में 22.49 प्रतिशत, आष्टा में 26.66 प्रतिशत, तासगांव में 24.90 प्रतिशत, जत में 22.25 प्रतिशत, पलुस में 25.23 प्रतिशत, शिराला में 29.58 प्रतिशत मतदान हुआ।

21 दिसंबर को आएंगे नतीजे

इधर महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजों को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने सोमवार को महत्वपूर्ण आदेश देते हुए निर्देश दिया कि राज्य की सभी नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव परिणाम एक साथ 21 दिसंबर को जारी किए जाएं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग तारीखों पर नतीजे घोषित करने से भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए सभी निकायों के परिणाम एक ही दिन घोषित किए जाएं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

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