

Maharashtra Drought Relief Student: महाराष्ट्र के 305 सूखाग्रस्त तालुकों के विद्यार्थियों को राहत देने के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विभाग के निर्देशों के अनुसार, सूखे की स्थिति को देखते हुए संबंधित विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क नहीं वसूला जा सकेगा।
विभाग ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को इस व्यवस्था का पालन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अतिरिक्त शुल्क वसूलने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
उच्च शिक्षण निदेशक डॉ. शैलेंद्र देवलाणकर ने स्पष्ट किया कि 'राजर्षी छत्रपति शाहू महाराज शिक्षण शुल्क छात्रवृत्ति योजना' और सूखे के कारण मिलने वाली शुल्क छूट अलग-अलग सुविधाएं हैं। इसलिए सूखाग्रस्त क्षेत्रों के पात्र विद्यार्थियों को निर्धारित नियमों के अनुसार मिलने वाली राहत को छात्रवृत्ति योजना से अलग समझा जाना चाहिए।
तकनीकी शिक्षा निदेशक डॉ. प्रमोद नाईक ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यावसायिक कॉलेज शिक्षण शुल्क के अलावा अतिरिक्त राशि वसूलता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा निदेशालय (डीटीई) के अंतर्गत आने वाले संस्थानों पर भी लागू होगी।
यदि कोई कॉलेज शुल्क नियमन प्राधिकरण (एफआरए) द्वारा स्वीकृत फीस से अधिक राशि की मांग करता है, तो विद्यार्थी सीधे डीटीई में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। विभाग ने संस्थानों को निर्धारित शुल्क नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
विद्यार्थियों को होने वाली परेशानियों का जल्द समाधान करने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर विशेष संपर्क अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इन अधिकारियों के माध्यम से विद्यार्थियों की शिकायतों और समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि शुल्क संबंधी नियमों का उल्लंघन करने या अवैध रूप से फीस वसूलने वाले शिक्षण संस्थानों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले का उद्देश्य सूखे से प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ कम करना और उन्हें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जारी रखने में सहायता देना है।