

Maharashtra Anti Conversion Law News: महाराष्ट्र में लव जिहाद को रोकने के लिए आए नए धर्मांतरण विरोधी कानून यानी 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' को लेकर एक बड़ी कानूनी चूक का मामला सामने आया है। राज्य में यह कानून अभी लागू भी नहीं हुआ था कि पुणे पुलिस ने इसके तहत दो अलग-अलग मामलों में FIR दर्ज कर दी। कानूनी विसंगतियों और आरोपियों के वकीलों द्वारा संविधान का हवाला दिए जाने के बाद अब पुणे पुलिस ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और दर्ज मुकदमों से गैर-लागू धाराएं हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पहला मामला पुणे के फुरसुंगी इलाके का है, जहां 5 अगस्त को एक नाबालिग लड़की के कथित अपहरण, यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के प्रयास का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति पर नए धर्मांतरण कानून के तहत केस दर्ज किया। वहीं दूसरा मामला एक ब्रिटिश-भारतीय मिशनरी पंकज जेम्स देवन्नूर से जुड़ा है, जिन पर 9 अगस्त को एफआईआर दर्ज की गई थी।
आश्चर्य की बात यह है कि जिस नए कानून की धाराएं पुणे पुलिस ने एफआईआर में शामिल की थीं, महाराष्ट्र सरकार ने उस कानून को लागू करने की आधिकारिक तारीख इन मामलों के दर्ज होने के 23 दिन बाद तय की थी। यह कानून महाराष्ट्र में रक्षाबंधन यानी 28 अगस्त से लागू होगा।
दोनों आरोपियों के वकीलों द्वारा कानूनी विसंगति की ओर ध्यान दिलाए जाने के बाद पुणे पुलिस ने गलती मानी। सहायक पुलिस आयुक्त सचिन हिरे ने बताया कि पंकज जेम्स देवन्नूर के खिलाफ 9 अगस्त को दर्ज एफआईआर से वे सभी धाराएं हटाई जाएंगी, जो उस समय लागू नहीं थीं।
पंकज देवन्नूर के वकील विजय थोम्ब्रे ने पुलिस की कार्रवाई को बड़ी चूक बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने 7 अगस्त को कथित कार्यक्रम और धर्मांतरण विरोधी कानून लागू होने की निर्धारित तारीख के बीच के अंतर पर ध्यान नहीं दिया। थोम्ब्रे ने संविधान के अनुच्छेद 20(1) का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को ऐसे कानून के तहत दंडित नहीं किया जा सकता, जो कथित घटना के समय लागू ही नहीं था।
वकील विजय थोम्ब्रे ने कहा कि मुवक्किल को 12 अगस्त को अंतरिम अग्रिम जमानत मिली थी। वह भारत में एक चर्च कार्यक्रम में शामिल होने आए थे और इसका धर्मांतरण या ऐसी किसी गतिविधि से कोई संबंध नहीं था।