

Pune Katraj Kondhwa Road Accident: पुणे जिले के कात्रज-कोंढवा सड़क पर लगातार हो रहे हादसों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गुरुवार को महानगरपालिका की सामान्य सभा में प्रशासन को जमकर घेरा गया। सड़क पर हुए हादसे में 16 वर्षीय युवती की मौत का मुद्दा कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना (ठाकरे गुट) के नगरसेवकों ने उठाया।
नगरसेवकों ने आरोप लगाया कि वर्षों से सड़क का निर्माण कार्य जारी है, लेकिन निर्माण के दौरान यातायात प्रबंधन और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय नहीं किए जा रहे हैं। इसके चलते अब तक 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
महापौर मंजूषा नागपुरे की अध्यक्षता में मनपा की नई इमारत स्थित 'हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक श्री छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह' में सामान्य सभा आयोजित हुई। इस दौरान महापौर ने जिस तरह से तीन महीने पहले दिए गए आदेश को लेकर सवाल उठाया उससे लगता है कि महापौर के आदेश की प्रशासन ने अनदेखी की है।
पुणे महानगरपालिका की सामान्य सभा शुरू होते ही कात्रज कोंढवा सड़क का मुद्दा गरमा गया। विभिन्न दलों के 50 से अधिक नगरसेवकों ने चर्चा में भाग लेते हुए सड़क विभाग के कामकाज और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए, नगरसेवकों ने कहा कि कात्रज-कोंढवा मार्ग पर निरंतर यातायात जाम रहता है।
सड़क का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है, निर्माण कार्य के दौरान संबंधित ठेकेदार द्वारा आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए जा रहे हैं। इसके बावजूद महानगरपालिका का सडक विभाग और संबंधित अधिकारी इस स्थिति को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
पुणे महानगरपालिका के नगरसेवकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की कथित घोर लापरवाही के कारण वाहन चालकों और पैदल चलने वाले नागरिकों की जान जोखिम में पड़ी हुई है। इस मार्ग पर अब तक 21 लोगों की मृत्यु होने का दावा किया गया।
पुणे शहर में सड़कों की स्थिति और गड्ढों की वास्तविक जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने के लिए शहर अभियंता कार्यालय ने लगभग तीन महीने पहले क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकारियों को प्रतिदिन सुबह दो घंटे अपने-अपने क्षेत्र की सड़कों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे।
पुणे जिले के अधिकारियों को चार पहिया वाहनों के स्थान पर दोपहिया वाहनों से सड़कों का निरीक्षण करने और उसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
महापौर ने इस आदेश की वर्तमान स्थिति पर भी सवाल उठाया, उन्होंने पूछा कि कितने अधिकारियों ने प्रतिदिन दो घंटे सड़क पर उतरकर निरीक्षण किया? और कितने अधिकारियों ने चार पहिया वाहनों के बजाय दोपहिया वाहनों से सड़कों का जायजा लिया? इसकी तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत करने को कहा गया।
पुणे शहर अभियंता अनिरुद्ध पावसकर ने लगभग पौन घंटे तक प्रशासन की ओर से पक्ष रखा, उन्होंने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में यातायात की समस्या को दूर करने के लिए जारी और प्रस्तावित परियोजनाओं की जानकारी दी।
हालांकि, ये परियोजनाएं वास्तव में कब शुरू होंगी, इस पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि महापौर द्वारा पूछे गए चार प्रमुख सवालों और अधिकारियों के दैनिक सड़क निरीक्षण से संबंधित प्रश्नों पर प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
पुणे महानगरपालिका के नगरसेवकों के सवालों का जवाब देने के लिए शहर अभियंता अनिरुद्ध पावसकर सदन में उपस्थित हुए। इस दौरान महापौर मंजूषा नागपुरे ने प्रशासन को केवल सामान्य जानकारी देने के बजाय चार मुख्य मुद्दों पर स्पष्ट उत्तर देने के निर्देश दिए।
महापौर ने पूछा कि मनपा की सीमा में शामिल किए गए नए गांवों में सड़क, फुटपाथ और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कुल कितने कोष (निधि) की आवश्यकता है? चालू वित्त वर्ष के बजट में इसके लिए कितनी राशि का प्रावधान किया गया है? क्या एक साथ सभी सड़कें बनाई जा सकती है? इसके अतिरिक्त, वर्तमान में अस्तित्व में मौजूद सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के लिए कितने कोष की आवश्यकता होगी, इसकी विस्तृत जानकारी भी मांगी गई।