भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि: आयुका के शोधकर्ताओं ने मैजेलैनिक ब्रिज में खोजा दुर्लभ तारकीय मंडल

Pune IUCAA News: पुणे के आयुका के वैज्ञानिकों ने मैजेलैनिक ब्रिज क्षेत्र में दुर्लभ तारकीय प्रणाली की खोज की है। ई-रोसिटा डेटा से हुई इस खोज से ब्रह्मांडीय विकास को समझने में मदद मिलेगी।
IUCAA Pune scientists discovered a rare stellar system in the Magellanic Bridge using eROSITA data, unlocking new insights into cosmic evolution and stellar physics.
पुणे वैज्ञानिक प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Pune IUCAA Magellanic Bridge Discovery: भारतीय खगोल वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पुणे स्थित इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आयुका) के वैज्ञानिकों ने पहली बार मैजेलैनिक ब्रिज क्षेत्र में एक दुर्लभ युगल तारकीय प्रणाली की खोज की है। इस खोज से ब्रह्मांड में तारों के निर्माण और उनके विकास को समझने में वैज्ञानिकों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

सर्वे को पूरा करने में लगे 556 दिन

इस महत्वपूर्ण शोध का नेतृत्व आयुका के वैज्ञानिक डॉ. तथागत साहा और प्रो। चान्द्रेयी मैत्रा ने किया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि खोजी गई प्रणाली में एक श्वेत बौना तारा और उसकी परिक्रमा करने वाला लाल महादानव तारा शामिल है।

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ऐसी दुर्लभ तारकीय प्रणालियां ब्रह्मांडीय प्रक्रियाओं को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। यह खोज ब्रहमांड का एक्स-रे प्रकाश में अध्ययन करने वाली ई-रोसिटा दूरबीन से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के दौरान सामने आई। जर्मनी की ई-रोसिटा टीम द्वारा जारी डेटा रिलीज-2 में पहले तीन आकाशव्यापी एक्स-रे सर्वेक्षणों की जानकारी शामिल है। इन सर्वेक्षणों को पूरा करने में 556 दिन लगे।

20 लाख एक्स-रे स्रोतों का किया गया विश्लेषण

ई-रोसिटा सर्वेक्षण से वैज्ञानिकों को करीब 20 लाख एक्स-रे स्रोतों का विशाल डेटाबेस मिला है, जिसमें 19 लाख से अधिक बिंदुनुमा स्रोत और लगभग 64 हजार विस्तारित खगोलीय संरचनाएं शामिल हैं।

दृश्य और इन्फ्रारेड सर्वेक्षणों के साथ इन आंकड़ों के विश्लेषण से स्रोतों की पहचान और दूरी का सटीक अनुमान संभव हुआ। इसी दौरान मैजेलैनिक ब्रिज क्षेत्र में एक दुर्लभ तारकीय प्रणाली की खोज हुई। यह क्षेत्र लार्ज मैजेलैनिक क्लाउड और स्मॉल मैजेलैनिक क्लाउड के बीच स्थित है और तारों के निर्माण व विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

500 दिनों के चक्र में फैलता-सिकुड़ता है

वैज्ञानिकों ने ईआरएएसएसयू जे043115.8-711730 नामक एक्स-रे स्रोत की पहचान की, जिसमें श्वेत बौना और लाल महादानव तारा मौजूद हैं। लाल महादानव करीब 500 दिनों के चक्र में फैलता-सिकुड़ता है और उससे निकलने वाली गैस श्वेत बौने पर गिरकर तीव्र एक्स-रे विकिरण पैदा करती है।

ऐसी प्रणाली को 'सिम्बायोटिक एक्रीटिंग सिस्टम' कहा जाता है। भारतीय शोधकर्ताओं डॉ। तथागत साहा और प्रो। चान्द्रेयी मैत्रा के अनुसार, मैजेलैनिक ब्रिज में ऐसी प्रणाली की यह पहली खोज है। जो आकाशगंगाओं के विकास और तारकीय प्रक्रियाओं को समझने में मदद करेगी।

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