

Cipla Pune Warehouse License Cancelled: वडकी स्थित मेसर्स सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के सीएंडएफ गोदाम का दवा बिक्री और वितरण लाइसेंस खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने रद्द कर दिया है। जांच में ‘रिएक्टिन प्लस’ दवा के पैकेट पर भ्रामक दावे और मानव आकृति का इस्तेमाल पाए जाने के साथ ही गोदाम में दवाओं के भंडारण, स्वच्छता, रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भी गंभीर खामियां सामने आईं।
यह कार्रवाई मुंबई हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सुनवाई का पूरा अवसर देने और कंपनी का पक्ष सुनने के बाद की गई है। एफडीए ने 4 सितंबर को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनी ने 11 सितंबर को लिखित जवाब दिया, जबकि 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई हुई। इसके बाद जांच के निष्कर्ष, कंपनी के स्पष्टीकरण और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार कर लाइसेंस प्राधिकरण ने आदेश जारी किया।
जांच के दौरान ‘रिएक्टिन प्लस’ अनुसूची ‘एच’ में शामिल दवा पाई गई। इसके पैकेट पर सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, शरीर दर्द तथा दांत दर्द से तुरंत राहत मिलने जैसे दावे किए गए थे। पैकेट पर मानव आकृति के जरिए मांसपेशियों के दर्द में राहत का चित्रण भी किया गया था। एफडीए के अनुसार, ये दावे और चित्रण दवा के लेबलिंग संबंधी वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे।
गोदाम की जांच में कई अन्य अनियमितताएं भी सामने आईं। आवश्यक ‘फॉर्म-35’ निरीक्षण पुस्तक उपलब्ध नहीं थी। दवाओं के बॉक्स पैलेट और रैक के बजाय सीधे जमीन पर रखे मिले। स्टॉक पर धूल जमी थी।
एक्सपायरी दवाओं के लिए अलग क्षेत्र और स्पष्ट सूचना-पट्ट नहीं था। ऐसी दवाओं के निपटारे की निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिले। इसके अलावा खरीद-बिक्री की रसीदों में खामियां तथा कंप्यूटर रिकॉर्ड और वास्तविक दवा स्टॉक में अंतर पाया गया। इस अंतर में एंटीबायोटिक दवाएं भी शामिल थीं।
कंपनी की ओर से उत्पादक की जिम्मेदारी होने का स्पष्टीकरण दिया गया था। हालांकि, लाइसेंस प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि दवा बाजार में लाने वाले विक्रेता की भी अपनी स्वतंत्र वैधानिक जिम्मेदारी होती है। इसलिए केवल निर्माता की जिम्मेदारी बताकर बिक्री एवं वितरण संबंधी अनुपालन से बचा नहीं जा सकता।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि दवाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला में वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए कंपनी को सुनवाई का अवसर दिया गया और प्राकृतिक न्याय, पारदर्शिता तथा कारणयुक्त निर्णय की प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह आदेश जारी किया गया।
नवभारत लाइव के लिये समीर सय्यद की रिपोर्ट