पुणे के मॉडल स्कूल का निर्माण अधूरा, 1.26 करोड़ मंजूर फिर भी छात्रों की सुरक्षा पर खतरा

Pune Zilla Parishad Model School: दौंड के राजेगांव ZP मॉडल स्कूल के लिए ₹1.26 करोड़ मंजूर होने के बाद भी निर्माण अधूरा है। सुरक्षा खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया है।
Villagers halted construction at Rajegaon ZP Model School in Daund due to delays and safety hazards caused by the contractor despite a ₹1.26 cr fund.
मॉडल स्कूल प्रोजेक्ट सांकेतिक फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Daund Rajegaon Zilla Parishad Model School Delay: पुणे दौंड तहसील के राजेगांव स्थित जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय को 'मॉडल स्कूल' योजना के तहत 1.26 करोड़ रुपये का बड़ा कोष मंजूर हुआ है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों को अत्याधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना था। हालांकि, नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुए एक महीना बीत जाने के बाद भी स्कूल में निर्माण कार्य पूरी तरह अधूरा पड़ा है।

संबंधित ठेकेदार के सुस्त और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण परिसर में छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस अव्यवस्था से आक्रोशित होकर ग्राम समिति और स्थानीय निवासियों ने निर्माण कार्य पूरी तरह बंद करवा दिया।

पुणे की महिमन कंस्ट्रक्शन कंपनी को इस मॉडल स्कूल के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ठेकेदार द्वारा कार्य अत्यंत धीमी गति से किया जा रहा है। विद्यालय परिसर में बालू, सीमेंट की बोरियां, ईंटें, उघड़ी लोहे की छड़ें और अन्य निर्माण सामग्री अस्ताव्यस्त फैली पड़ी है।

इससे पूरे विद्यालय परिसर ने एक डंपिंग यार्ड का रूप ले लिया है। कक्षाओं के आसपास बिखरे इस मलबे के कारण छोटे बच्चों के चोटिल होने और किसी बड़े हादसे का डर लगातार बना हुआ है। स्कूल प्रबंधन समिति ने छात्रों की असुविधा और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने कनिर्माण कार्य पूरी तरहे लिए ठेकेदार को कई बार मौखिक और लिखित निर्देश दिए थे।

छात्रों की सुरक्षा पर मंडरा रहा गंभीर खतरा

प्रबंधन समिति राजेगांव गणेश वाघमारे ने बाताया करोड़ों रुपये का सरकारी फंड मंजूर होने के बावजूद खराब नियोजन के कारण बच्चों की जान से खिलवाड़ का नजारा देखने को मिल रहा है। नए सत्र में परिसर की ऐसी स्थिति से अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

अब पूरी दौंड तहसील की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा विभाग और वरिष्ठ अधिकारी इस ठेकेदार पर क्या सख्त कार्रवाई करते हैं। ग्रामीण जल्द से जल्द छात्रों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। नया शैक्षणिक वर्ष शुरू हुए 1 महीना बीत चुका है, फिर भी बच्चे कहां खेलें और कैसे रहें? अगर परिसर में कोई दुर्घटना होती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?