

Khadakwasla Chaskaman Dam Water Discharge Pune: पुणे जिले और उसके घाट क्षेत्रों में लगातार जारी मूसलाधार बारिश जारी है। लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण जिले के प्रमुख जल स्रोतों और बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे वे अपनी अधिकतम क्षमता के करीब पहुंच गए हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग ने खड़कवासला, चासकमान, वडिवले,
मुलशी और कासारसाई समेत छह प्रमुख बांधों से पानी का डिस्चार्ज भारी मात्रा में बढ़ा दिया है। इस भारी जल विसर्ग के चलते मुठा, भीमा, मुला और पवना नदियों के किनारे बसे निचले इलाकों के नागरिकों के लिए गंभीर चेतावनी जारी की गई है।
सिंचाई विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक दबाव चासकमान बांध पर है, जो 99 प्रतिशत भर चुका है। कैचमेंट क्षेत्र में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण यहां से भीमा नदी में छोड़े जाने वाले पानी का डिस्चार्ज बढ़ाकर 29,793 क्यूसेक कर दिया गया है। वहीं, खड़कवासला बांध शत-प्रतिशत भर गया है, यहां से मुठा नदी में कुल 9,372 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
मावल तहसील स्थित वडीवले बांध 99.47 प्रतिशत भरने के बाद 7,783 क्यूसेक पानी छोड़ रहा है, जबकि मुलशी बांध से मुला नदी में 10,000 क्यूसेक और कासारसाई बांध के नाले में 750 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा, खड़कवासला श्रृंखला के पानशेत (82.29%), वरसगांव (76.88%) और टेमघर (61.68%) बांधों में भी जल संग्रहण संतोषजनक स्तर पर है। संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस, जल संपदा और आपदा प्रबंधन विभाग ने संयुक्त रूप से नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति नदी या नाले के पात्र में प्रवेश न करे। नदी किनारे रखे कृषि उपकरण, मोटर पंप, वाहन, निर्माण सामग्री और पशुओं को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा, पुलों पर भीड़भाड़ से बचने और सोशल मीडिया के लिए सेल्फी लेने हेतु नदी के करीब जाने पर सख्त रोक लगाई गई है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।
एक तरफ जहां बांधों के ओवरफ्लो होने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पिंपरी-चिंचवड़ के नागरिकों के लिए एक निराशाजनक और विरोधाभासी स्थिति बनी हुई है। पवना बांध के 96 प्रतिशत भर जाने के बावजूद शहर में 19 जून से लागू 15 प्रतिशत पानी कटौती और एक दिन आढ़ जलापूर्ति का नियम फिलहाल रद्द नहीं किया गया है।
महापालिका के जल आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक अक्टूबर के अंत तक बांधों में शत-प्रतिशत जल संग्रहण सुरक्षित नहीं रहता या बहुप्रतीक्षित 'भामा आसखेड़ परियोजना का पानी शहर तक नहीं पहुंच जाता, तब तक यह वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था जारी रहेगी। गौर करने योग्य है कि समन्यायी पानी वितरण का हवाला देते हुए 25 नवंबर 2019 को शुरू की गई इस व्यवस्था को साढ़े छह साल से अधिक का समय बीत चुका है।
आज भी शहरवासी अनियमित, अपुरा और कम दबाव के पानी के संकट से जूझ रहे है, जिससे यह साबित होता है कि प्रकृति की कृपा के बावजूद ढांचागत और प्रशासनिक चुनौतियों नागरिकों के जीवन को सहज नहीं होने दे रही है। वर्तमान परिस्थितियों में यह अत्यंत आवश्यक है कि नागरिक पूर्ण सावधानी बरतें और प्रशासन मुस्तैदी के साथ हर स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखे।.