CM की आलोचना देश के खिलाफ युद्ध नहीं: महादेव बालगुडे को जमानत देते हुए पुणे कोर्ट की टिप्पणी

Pune Court Order: पुणे कोर्ट ने NCP के महादेव बालगुडे को जमानत देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री या सरकार की आलोचना करना देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसा नहीं है।
Criticizing CM or government isn't waging war against nation, rules Pune Court while granting bail to NCP social media head Mahadev Balgude.
प्रतीकात्मक तस्वीर- (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Mahadev Balgude Bail Order: पुणे की एक अदालत ने राकांपा (शरद गुट) की सोशल मीडिया इकाई के प्रदेश अध्यक्ष महादेव बालगुडे को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करना मात्र राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने के समान नहीं माना जा सकता। साथ ही स्पष्ट किया कि प्रत्येक नागरिक को सरकार के कार्यों पर टिप्पणी करने, उसकी सराहना करने और आलोचना करने का संवैधानिक अधिकार है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी. डी. कुलकर्णी ने बालगुडे की जमानत याचिका मंजूर करते हुए यह टिप्पणी की। बालगुडे को अप्रैल में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की छेड़छाड़ की गई तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने और नक्सलियों के प्रति सहानुभूति दर्शाने वाली सामग्री पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ विविध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

धारा 152 भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को जानबूझकर खतरे में डालने से संबंधित है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केस से जुड़े दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी ने कुछ मामलों की जांच प्रक्रिया और सरकार की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए थे। ये विषय सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा हैं।

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घोषणा की, लोगों को इसके लिए उकसाया या भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कोई कृत्य किया। न्यायालय ने यह भी माना कि इस मामले में बीएनएस की धारा 152 लागू होना स्वयं विवाद का विषय है, जबकि आरोपी के खिलाफ लगाई गई अन्य सभी धाराएं जमानती प्रकृति की हैं।

बचाव पक्ष ने बताया राजनीतिक द्वेष का मामला

सुनवाई के दौरान बालगुडे के अधिवक्ता समीर शेख ने दलील दी कि यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना करना संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के अंतर्गत आता है।

जांच पूरी, हिरासत की जरूरत नहीं

अदालत ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ऐसे में आरोपी से आगे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने महादेव बालगुडे को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और एक या दो जमानतदारों के आधार पर जमानत प्रदान की।

साथ  ही उन्हें साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने, जांच अधिकारी को अपना पता और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने तथा अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाने का निर्देश दिया।

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